ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय में उर्दू की अनदेखी करने का आरोप

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,04 मार्च 2021 उत्तर प्रदेश में फैले दीनी मदरसों के छात्रों के लिए उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाकर उच्च शिक्षा की एक महत्वपूर्ण योजना तैयार की गई थी। उसके तहत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती विश्वविद्यालय में उर्दू, अरबी और फारसी भाषा को फरोग देने के लिए कोर्स तैयार किया गया था। और बड़ी संख्या में छात्र इससे लाभान्वित हो रहे, लेकिन हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों से विचलन किया है और ऐसा वातावरण बनाया है कि मदरसों के छात्र इससे लाभान्वित नहीं हो सकते हैं। हाल ही में, इस विश्वविद्यालय के लोगों से उर्दू भाषा को ही गायब कर दिया गया, जो कि इस विश्वविद्यालय की जीवनदायिनी थी। इस सिलसिले में अलइत्तिहाद एजुकेशनल सोशल एंड वेलफेयर सोसाइटी के नेतृत्व में सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए दिनांक 7 इतवार को दिन में २ बजे एक सेमिनार का आयोजन किया है। जिसमे पूर्व कुलपति और उक्त विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनीस अंसारी समारोह की अध्यक्षता करेंगे। विशिष्ट अतिथि यूनिस सिद्दीकी पूर्व जिला अध्यक्ष अल्पसंख्यक कल्याण कांग्रेस, मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी, डॉ० शमीम अहमद सिद्दीकी, मौलाना जहाँगीर आलम कासमी, मौलाना मुस्तफा नदवी, कुतुब अल्लाह, जियाउल्लाह नदवी, डॉ० खुर्शीद जहाँ, इरशाद अहमद, रफीक अहमद एडवोकेट , शहजादे मंसूर अहमद, डॉ० फिरोज हुदा,आदि उपस्थित रहेंगे। इस संबंध में एक महत्वपूर्ण बैठक आज राष्ट्रीय भागीदारी आंदोलन के ऑफिस में उसके संयोजक पी सी कुरील की अध्यक्षता में की गयी। जिसमे सोसाइटी के अध्यक्ष व इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी और सामाजिक कार्यकर्ता संगठन के संयोजक मुहम्मद अफाक, मुहम्मद हुसैन, फातिमा शहाब, रानी सिद्दीकी, अफसाना सिद्दीकी , नसरीन जावेद आदि उपस्थित थे।

रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली