*नानाजी भारतीयता की जीवंत अभिव्यक्ति थे – तरुण विजय*
उत्तर प्रदेश (दैनिक कर्मभूमि) चित्रकूट: सुप्रसिद्ध राष्ट्रवादी चिंतक, पांचजन्य के पूर्व संपादक एवं प्रख्यात पत्रकार, स्तंभकार तरुण विजय ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय में आयोजित नानाजी स्मृति व्याख्यान माला में कहा कि भारतीयता के दर्शन करने हो, तो नाना जी को देखना चाहिए। भारतीय संस्कृति और मूल्य जिन ग्रामीण जनों में संरक्षित और संपोषित हैं, उन्हें राष्ट्र के वास्तविक नायक बनाने में अपनी समस्त ऊर्जा निवेश करने वाले राष्ट्रऋषि नानाजी वास्तव में भारत रत्न है, क्योंकि जिन ग्रामों और ग्रामीणों में भारत की आत्मा बसती है उन्हें खुशहाल और संपन्न बनाने के लिए नाना जी ने अपना पूरा जीवन दे दिया। नाना जी को जानने समझने के लिए किसी आयोजन की आवश्यकता नहीं। जब राष्ट्रप्रेम और भारतीयता से ओतप्रोत हमारी मानवीय संवेदनाओ में पीड़ित और उपेक्षित ग्राम वासियों की पीड़ा एकाकार हो जाएगी, वही नानाजी प्रकट होगें।
ग्रामोदय विवि के संस्थापक कुलाधिपति नानाजी देशमुख के जन्म दिवस 11 अक्टूबर को आयोजित व्याख्यानमाला में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान सूर्य प्रताप शाही, मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो भरत शरण सिंह, दीन दयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव एवं ग्रामोदय विश्वविद्यालय प्रबंधन मंडल के सदस्य अभय महाजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो भरत मिश्रा अध्यक्ष के रूप में मौजूद रहे। कुलसचिव डॉ अजय कुमार ने आभार माना और संयोजन विज्ञान एवं पर्यावरण संकाय के अधिष्ठाता त्रिपाठी ने किया।
उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने नाना जी के कुशल संगठन के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए। अपनी और अपने परिवार के साथ नानाजी के संबंधों का उल्लेख करते हुए मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वे सदैव गुणी और योग्य लोगों को आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर स्वयं पीछे रहते थे। यही उनके संगठन कौशल की अनूठी विशेषता थी । अपने प्रयास से नाना जी ने देश को अनेक राष्ट्रभक्त और समर्पित कार्यकर्ता प्रदान किए । नाना जी ने शिक्षालयो को मंदिर का दर्जा दिया और सरस्वती शिशु मंदिर की लंबी श्रृंखला तैयार की, जो आज सफल गाथाओं में उल्लेख की जाती है। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालयो के नियामक आयोग के अध्यक्ष प्रो भरत शरण सिंह ने विश्वविद्यालयों का आवाहन किया कि वे नाना जी के विचारों को अपने दैनिक क्रियाकलापों का हिस्सा बनाएं। प्रो शरण ने ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ग्राम प्रवास की सराहना करते हुए इच्छा व्यक्त किया कि अन्य विश्वविद्यालय भी सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभाग कर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की बेहतरी के लिए छात्रों के साथ मिलकर कार्यक्रम बनाएंगे और उन्हें पूरी इच्छा के साथ लागू करेगें।
कार्यक्रम में दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा कि नाना जी के सानिध्य में दिल्ली, गोंडा, चित्रकूट, बीड, उड़ीसा और महाराष्ट्र के अनेक क्षेत्रों में कार्य करने का सौभाग्य मिला। नाना जी ऐसे पारस पत्थर थे, जिसे वे संपर्क में आने के बाद सोने जैसा मूल्यवान बना देते थे । हमारे जीवन की यही सार्थकता है कि नाना जी के बताए रास्ते पर चलकर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खुशहाली के लिए प्रयास करें। यही सच्ची राष्ट्रसेवा एवं नाना जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ग्रामोदय विवि के कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने कहा कि चित्रकूट में ऋषियों की परंपरा में ही एक विभूति थे नानाजी देशमुख। ग्रामोदय विश्वविद्यालय की स्थापना में उन्होंने जो संकल्पना की थी, वह तीन दशकों बाद बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्पष्ट परिलक्षित होती है। विश्वविद्यालय पूरी निष्ठा और विश्वास से नाना जी के संकल्पों को वास्तविकता में बदलने के लिए कृत संकल्पित है। विश्वविद्यालय के सामाजिक उत्तरदायित्व कार्यक्रम के द्वारा छात्रों के सर्वांगीण विकास और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रतिपादित सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित समाज कार्य पाठ्यक्रम की उन्होंने विस्तार से चर्चा की। प्रो मिश्रा ने कहा कि नाना जी के बताए रास्ते पर चलकर आज विश्वविद्यालय प्रदेश के 10 संभागों 52 जिलों और 313 विकास खंडों में ग्रामीण विकास के समग्र चिंतन को लेकर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कार्यक्रम का प्रारंभ नाना जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। छात्र छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के संयोजक एवं विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो आईपी त्रिपाठी ने स्वागत परिचय कराया। कुलपति प्रो भरत मिश्रा ने शाल, श्रीफल व पुष्प गुच्छ से सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार माध्यमों के विशेषज्ञ प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार व्यास ने किया। इस अवसर पर ग्रामोदय विवि के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, छात्र मौजूद रहे।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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