उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समय पर एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग को सबसे प्रभावी उपाय बताया जा रहा है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि यदि किशोरियों का समय पर टीकाकरण कराया जाए और महिलाओं की नियमित जांच होती रहे तो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है।
एचपीवी संक्रमण है सबसे बड़ा कारण
डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण एचपीवी संक्रमण है। यह संक्रमण मुख्य रूप से यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है। अधिकांश महिलाओं में यह संक्रमण स्वतः समाप्त हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में लंबे समय तक बने रहने पर यह कैंसर का रूप ले सकता है। इसलिए बीमारी होने का इंतजार करने के बजाय बचाव के उपाय अपनाना अधिक जरूरी है।
कम उम्र में वैक्सीन का अधिक लाभ
डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि 9 से 14 वर्ष की आयु में एचपीवी वैक्सीन लगवाना सबसे अधिक प्रभावी माना जाता है। इस आयु वर्ग में दो डोज़ पर्याप्त होती हैं, जबकि 15 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को सामान्यतः तीन डोज़ दी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर अधिक आयु की महिलाएं भी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार यह वैक्सीन लगवा सकती हैं। यह टीका सर्वाइकल कैंसर के साथ-साथ कैंसर बनने से पहले होने वाले बदलावों और जननांग मस्सों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
वैक्सीन के बाद भी स्क्रीनिंग जरूरी
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन सभी प्रकार के वायरस से पूरी सुरक्षा नहीं देती। इसलिए वैक्सीन लगवाने के बाद भी समय-समय पर पैप स्मीयर (Pap Smear) या एचपीवी टेस्ट कराना जरूरी है। नियमित जांच से बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाता है, जिससे इलाज आसान और सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि महिलाओं को असामान्य रक्तस्राव, दुर्गंधयुक्त सफेद पानी, संभोग के बाद रक्तस्राव, लगातार कमर या पेल्विक दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षणों की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
डॉ. वंदना शर्मा ने कहा कि एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके बाद इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, सूजन या हल्का बुखार जैसी सामान्य प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, जो कुछ समय में ठीक हो जाती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों का समय पर टीकाकरण कराएं और परिवार की महिलाओं को नियमित सर्वाइकल कैंसर जांच के लिए प्रेरित करें। उनका कहना है कि जागरूकता, समय पर टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग ही सर्वाइकल कैंसर से बचाव की सबसे मजबूत ढाल है।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर