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धनाभाव में रुक जाती कृष्णा की पढ़ाई, आर्थिक मदद ने जगाई नई उम्मीद

राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि)चित्रकूट: कृष्णा की माँ ने अर्चना श्रीवास्तव बताया कि उनका परिवार बहुत ही बुरे दौर से गुजर रहा था। ऐसा लगा कि बच्चे की पढ़ाई रुक जाएगी। क्योंकि इसके खर्चे वहन करने में मैं असमर्थ थी। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना परिवार के लिए आशा की किरण बनकर आई।

कच्ची छावनी तरौन्हा निवासी अर्चना बताती है कि उनके पति जेपी श्रीवास्तव का सपना था कि बच्चे कृष्णा को अच्छे स्कूल में पढ़ाना है। इसी सोच के आधार पर उन्होंने कृष्णा का दाखिला एक अच्छे स्कूल में करा दिया। कृष्णा के पिता जेपी श्रीवास्तव एक छोटी कोचिंग चलाते थे, अन्य बच्चों के साथ साथ कृष्णा को भी पढ़ाते थे। नियति को कुछ और ही मंजूर था। कृष्णा के पिता कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आ गए। इलाज के वावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनकी मौत के बाद कठिनाइयों का दौर शुरू हो गया। पति की मौत के सदमे से उबर नहीं पाए थे। उधर कृष्णा की पढ़ाई लिखाई में होने वाले खर्चे को लेकर चिंता सताने लगी। लग रहा था कि अब बच्चे का स्कूल से नाम कटाना पड़ेगा। क्योंकि स्कूल फीस, ट्यूशन सहित पढ़ाई के अन्य खर्चे की व्यवस्था करना बहुत मुश्किल हो रहा था। ऐसे कठिन वक्त में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना एक आशा की किरण लेकर आई। इस योजना से नवंबर 2021 तक पढ़ाई लिखाई अच्छे से चलती रही।

इधर कई माह से योजना के तहत मिलने वाली धनराशि नहीं मिल पाई। उम्मीद है कि जब धनराशि आएगी तो स्कूल की फीस के साथ साथ अन्य कर्जों की अदायगी हो जाएगी। जनपद आगमन पर कलेक्ट्रेट में अध्यक्ष बाल आयोग उत्तर प्रदेश डा देवेन्द्र शर्मा से मुलाकात के बाद आश्वासन मिला है कि शीघ्र ही धनराशि आने वाली है।

जिला प्रोबेशन अधिकारी रामबाबू विश्वकर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना दो प्रकार की है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य)। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के तहत 0 से 18 वर्ष के उन बालक बालिकाओं को आर्थिक मदद दी जा रही है, जिनके माता पिता (दोनों) या उनमें से किसी एक की मौत कोविड-19 संक्रमण, महामारी से 1 मार्च 2020 या उसके पश्चात हुई है। ऐसे परिवारों के सभी बच्चे जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है, को 4000 रुपए प्रति माह दिए जा रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री बाल योजना (सामान्य) के तहत उन बालक बालिकाओं को लाभ मिलता है, जिनके माता-पिता (दोनों) या दोनों में से किसी एक अथवा वैध अभिभावक की मौत कोविड से हटकर अन्य कारणों से 1 मार्च 2020 या उसके पश्चात हुई है। ऐसे बालक-बालिकाओं को 2500 रुपए प्रतिमाह की दर से आर्थिक मदद दी जा रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) में अब तक 62 बालक-बालिकाओं के खाते में धनराशि भेजी जा रही है। जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (सामान्य) में 81 बालक-बालिकाओं के खाते में धनराशि दी जा रही है।

 

*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

*जनपद* चित्रकूट

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