उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर देवउठनी एकादशी,जिसे प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी भी कहते हैं।कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाएगी है। अचार गौरव शास्त्री ने बताया कि यह वह दिन है जब भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं। इन चार महीनों के दौरान सभी मांगलिक कार्य,जैसे विवाह और गृह प्रवेश, बंद हो जाते हैं और भगवान के जागने के साथ ही इनकी शुरुआत होती है। इस साल देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी।
देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त
प. गौरव शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की तिथि 01 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर प्रारम्भ होगा। इसका समापन 02 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट पर होगा। देवउठनी एकादशी पर पूजन का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 50 मिनट से सुबह 05 बजकर 41 मिनट तक रहेगा।वहीं अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। अमृत काल सुबह 11 बजकर 17 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। रवि योग सुबह 06 बजकर 33 मिनट से शाम 06 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इन मुहूर्तों में पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
नवंबर 2025 में विवाह के शुभ मुहूर्तनवंबर 2025 में विवाह के लिए कुल 14 शुभ मुहूर्त रहेंगे।शुभ तिथियां 2, 3, 4, 5, 12, 13, 14, 15, 18, 21, 22, 23, 25, 30 नवंबर।
तुलसी विवाह की है परंपरा
प. गौरव शास्त्री ने बताया कि इस दिन भगवान विष्णु के शालग्राम अवतार और माता तुलसी का विवाह किया जाता है।भगवान की आरती करें। उन्हें सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को जरूर रखें क्योंकि बिना तुलसी के भगवान विष्णु भोग ग्रहण नहीं करते हैं।इस पावन दिन भगवान विष्णु के साथ ही माता लक्ष्मी की पूजा भी करें। इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।
देव उठनी एकादशी पर क्या करना चाहिए
देव उठनी एकादशी के दिन अपने घर के आंगन में अष्टदल बनाना चाहिए और पांच घर में जाकर अष्टदल के दर्शन जरूर करने चाहिए।प. गौरव शास्त्री ने बताया कि इस दिन जरूरतमंद लोगों को दान दे सकते हैं। इस दिन दान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। देव उठनी एकादशी के व्रत का पारण आंवला और तुलसी दल खाकर ही करना चाहिए। इस व्रत के दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल जरूर अर्पित करें। तुलसी भगवान विष्णु को बहुत ही प्रिय है। इस दिन भजन कीर्तन करना बहुत ही शुभ होता है। इस दिन भजन कीर्तन करने से विष्णु जी प्रसन्न होते हैं।
देव उठनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए
देव उठनी एकादशी के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन ना करें।प. गौरव शास्त्री ने कहा कि इस दिन भोजन में चावल का प्रयोग ना करें। देव उठनी एकादशी के दिन तुलसी का पत्ता ना तोड़ें। इस दिन तुलसी दल तोड़ना शुभ नहीं माना जाता है। देव उठनी एकादशी के दिन बेवजह का धन ना खर्च करें। इस दिन घर में बिल्कुल भी गंदगी नहीं होनी चाहिए। देव उठनी एकादशी पर शाम के समय में देव उठाए जाते हैं। इस दिन घर में किसी से भी वाद-विवाद न करें।
शुभ फल की प्राप्ति
मान्यता है कि जो दंपत्ति इस दिन श्रद्धापूर्वक तुलसी विवाह करवाते हैं,उन्हें सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही,अविवाहित लोगों के विवाह में आने वाली बाधाएं भी दूर होती हैं।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर
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