उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। मेहंदी रचे हाथ, सोलह शृंगार से सजा रूप और पूजा की थाली में सजे फूल-बेलपत्र… हरतालिका तीज पर घर-आंगन में आस्था का रंग नजर आएगा। सुहागिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना कर पति की दीर्घायु,अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करेंगी। कई घरों में मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाकर विधि-विधान से पूजन की तैयारियां भी की जाएंगी। पंडित गौरव शास्त्री के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि हरतालिका तीज के लिए विशेष मानी गई है। इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी भगवती गौरी हैं।पंडित गौरव शास्त्री के मुताबिक हरतालिका तीज पर प्रातःकाल और प्रदोष काल में शिव-पार्वती पूजन का विशेष महत्व है। प्रातः 6:15 से 8:45 बजे तक पूजन किया जा सकता है। वहीं शाम 6:30 से 7:54 बजे तक प्रदोष काल को मुख्य पूजन के लिए शुभ माना गया है। इस दौरान मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा बनाकर फूल, बेलपत्र, फल, प्रसाद और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद तीज व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है।
मेहंदी से लेकर चूड़ियों तक, सजेगा सुहाग
हरतालिका तीज पर सोलह शृंगार का विशेष महत्व माना जाता है। महिलाएं मेहंदी लगाकर नई साड़ी या पारंपरिक परिधान पहनेंगी। हरी और लाल चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और अन्य श्रृंगार सामग्री से सुहाग का संसार सजेगा। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से पूजन करेंगी। शाम को भजन-कीर्तन और शिव-पार्वती की स्तुति से माहौल भक्तिमय होगा।
तप और समर्पण की कहानी से जुड़ा पर्व
पंडित गौरव शास्त्री ने बताया कि हरतालिका तीज माता पार्वती के तप और भगवान शिव को पति रूप में पाने की कथा से जुड़ा पर्व है। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण इस दिन शिव-पार्वती की पूजा में श्रद्धा और संकल्प को विशेष महत्व दिया जाता है।उन्होंने बताया कि व्रत के दौरान क्रोध, विवाद और कटु वाणी से बचना चाहिए। मन को शांत रखकर शिव-शक्ति का स्मरण करना पर्व की भावना के अनुरूप है। धार्मिक परंपरा में निर्जला व्रत का विधान बताया गया है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास से बचना चाहिए। श्रद्धा के साथ किया गया पूजन ही इस पर्व की मूल भावना है।रात्रि में शिव-पार्वती की स्तुति,भजन-कीर्तन और जागरण भी किया जाता है। अगले दिन चतुर्थी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है। पंडित गौरव शास्त्री के अनुसार हरतालिका तीज केवल व्रत और श्रृंगार का पर्व नहीं, बल्कि दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास, संयम और समर्पण की भावना को मजबूत करने का अवसर भी है।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर