उत्तर प्रदेश ।( दैनिक कर्म भूमि) मिर्जापुर राष्ट्रीय एकता के लिए इतिहास के पन्नों में दृढ़ व्यक्तित्व के उल्लेखनीय महापुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती मनाने में पुलिस द्वारा किया गया उपद्रव यह जता गया कि ब्रिटिश हुकूमत का रवैया अभी भी बरकरार है।मामला यद्यपि राजधानी लखनऊ का है लेकिन इससे पूरे प्रदेश के हर जिले में विकास के कामों में सरकारी तंत्र के साथ कदमताल करने वाले अभियंत्रण विभाग के आफिसर एवं कर्मचारी तक हतप्रभ है।हुआ यह कि पांच सूत्री मांगों को लेकर पूरे प्रदेश के इंजीनियरिंग विभागों के राजपत्रित स्तर के अभियन्ताओं ने 16 अक्टूबर को लोकनिर्माण विभाग के लखनऊ स्थित मुख्यालय पर धरना दिया था और उसी दिन यह भी एलान कर दिया था कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो उत्तर प्रदेश इंजीनियर्स एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ 31 अक्टूबर को लौहपुरुष सरदार पटेल की जयंती पर हजरतगंज स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि प्रकट करने के लिए जुटेगा और सभा भी करेगा।
दोनों संगठनों में क्लास-2 से लेकर क्लास-1 तक के उच्चस्तरीय अधिकारी ही जुटे थे न कि स्कूली छात्र और न ही उपद्रव करने वाला कोई संगठन। लेकिन लखनऊ के जिला प्रशासन को न जाने क्या सूझा कि एक अवर अभियंता स्तर के दरोगा को सभास्थल पर भेज दिया जो पहुंचते ही ब्रिटिश काल की पुलिस की तरह पेश आया और वहां लगे बैनर को फाड़कर फेंक दिया तथा अभद्र आचरण पर उतारू हो गया।
रिपोर्ट राष्ट्रीय हेड राजेश कुमार मौर्य मिर्जापुर उत्तर प्रदेश
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