उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर शिक्षक विधायक और नेता निर्दलीय समूह राज बहादुर सिंह चंदेल ने आज सदन में तदर्थ शिक्षकों के विनियमितिकरण की मांग की उन्होंने कहा कि प्रदेश में विगत दो दशकों से हजारों शिक्षक माध्यमिक शिक्षा की लड़खड़ाती शिक्षा व्यवस्था को अपने कंधों पर उठाए हुए है ,लेकिन संगठन के कई बार आंदोलन करने एवं सदन में बार बार मुद्दा उठाए जाने पर भी इन शिक्षकों को अभी तक विनियमित नही किया गया है।सरकार ने कई बार आश्वासन भी दिया,पर कुछ शर्तों के कारण तदर्थ शिक्षकों को न्याय नहीं मिला।शिक्षकों द्वारा सरकार की वादाखिलाफी को देखते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया,जिस पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 26 अगस्त 2020 को उक्त अपील को निस्तारित करते हुए आदेश पारित कर दिए।लेकिन सरकार द्वारा अभी तक कोई निर्णय न लेने के कारण तदर्थ शिक्षकों के परिवारों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है,इनमे से कई शिक्षक रिटायर भी हो चुके है।नेक ग्रेड ए प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत 192 शिक्षकों का वेतन भुगतान शासन द्वारा नही किया जा रहा ही।ऐसे में इन महाविद्यालयों में अपने ज्ञान की गंगा बहाने वाले शिक्षक खुद ही भूखे प्यासे जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।ज्ञातव्य है कि सरकार द्वारा उच्च शिक्षा गुणवत्ता संवर्धन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 2 फरवरी 2014 से लागू की गई है।जी अभी भी चल रही है।उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के जिला मंत्री सर्वेश तिवारी ने बताया कि स्थिति अत्यंत गंभीर एवं संवेदनशील है,अगर इन शिक्षकों के विनियमितिकरण पर सरकार ने शीघ्र निर्णय नही लिया तो मजबूर होकर संगठन को संघर्ष की राह पर जाना पड़ेगा।सर्वेश तिवारी ने बताया कि तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने पर सरकार के राजकोष में कोई अतिरिक्त व्यय भार नही पड़ेगा।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर
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