*भीषण गर्मी में स्वास्थ्य सुरक्षा: डॉ. रविकांत त्रिपाठी ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव*  

राष्ट्रीय दैनिक कर्मभूमि अम्बेडकर नगर

 

टांडा, अम्बेडकर नगर। वर्तमान में पड़ रही प्रचंड गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए होम्योपैथिक चिकित्सा विकास महासंघ के जिला अध्यक्ष एवं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रविकांत त्रिपाठी ने जनसामान्य के लिए विस्तृत स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी से हम स्वयं एवं अपने परिवार को लू, डिहाइड्रेशन तथा गर्मीजनित रोगों से सुरक्षित रख सकते हैं।डॉ. त्रिपाठी के अनुसार प्रातः 11 बजे से सायं 4 बजे तक सूर्य की किरणें सर्वाधिक तीव्र होती हैं। अतः अत्यावश्यक न हो तो इस अवधि में घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। प्रातः 10 बजे से पूर्व अथवा सायं 5 बजे के पश्चात ही आवश्यक कार्य हेतु बाहर जाना उचित रहता है। यदि निकलना अपरिहार्य हो तो छाते का प्रयोग करना चाहिए, सिर को सूती कपड़े या टोपी से पूर्णतः ढकना चाहिए एवं धूप के चश्मे का उपयोग अवश्य करना चाहिए।आहार-विहार के संबंध में उन्होंने बताया कि गर्मी में सुपाच्य एवं तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाना चाहिए। छाछ, नींबू पानी, बेल का शरबत, सत्तू तथा नारियल पानी अत्यंत लाभकारी हैं। मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा और ककड़ी में जल की मात्रा अधिक होती है, अतः इनका सेवन हितकर रहता है। हरी सब्जियां, दाल का पानी एवं कम तेल-मसाले वाला भोजन ग्रहण करना चाहिए। वहीं तैलीय, मसालेदार, बासी एवं बाजार के खुले खाद्य पदार्थों से दूर रहना चाहिए। चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक एवं मदिरा का सेवन डिहाइड्रेशन को बढ़ाता है, इसलिए इन्हें न्यूनतम करना चाहिए। रात्रि में प्रोटीन युक्त भारी भोजन से भी बचना चाहिए। धूप एवं लू से बचाव हेतु जीवनशैली में परिवर्तन आवश्यक है। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि प्यास न लगी हो तब भी प्रत्येक घंटे में एक गिलास शीतल जल अवश्य पीना चाहिए ताकि शरीर में जल की कमी न हो। हल्के रंग के, ढीले-ढाले सूती वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि सिंथेटिक कपड़े गर्मी को अवशोषित करते हैं। दिन में खिड़की-दरवाजों पर गीले पर्दे लगाने तथा दोपहर में कूलर-पंखे के आगे पानी से भरा बर्तन रखने से घर का वातावरण शीतल रहता है। दोपहर के समय भारी शारीरिक श्रम एवं व्यायाम से बचना चाहिए। वृद्धजन, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे एवं पूर्व से रोगग्रस्त व्यक्ति को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

लू लगने के लक्षण जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी अथवा चक्कर आने पर तत्काल उपचार आवश्यक है। ऐसी स्थिति में रोगी को छायादार एवं हवादार स्थान पर लिटाकर शरीर को गीले कपड़े से पोंछना चाहिए। विशेषकर सिर, गर्दन एवं बगल में बर्फ या ठंडे पानी की पट्टी रखना लाभकारी रहता है। प्याज का रस कनपटी एवं छाती पर मलने तथा पैरों के तलवों में लगाने से भी राहत मिलती है। रोगी को ओआरएस का घोल, कच्चे आम का पना अथवा इमली का पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पिलाते रहना चाहिए। स्थिति में सुधार न होने पर निकटतम चिकित्सक से तत्काल परामर्श लेना चाहिए।

होम्योपैथी में बचाव के संबंध में डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ग्लोनाइनम 30, बेलाडोना 30, नैट्रम म्यूर 6X जैसी औषधियां लू एवं गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाव में लक्षणानुसार प्रयोग की जाती हैं। किंतु कोई भी औषधि योग्य चिकित्सक के परामर्श के बिना नहीं लेनी चाहिए।

अंत में उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि सावधानी ही सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि पशु-पक्षियों के लिए भी छायादार स्थान पर जल की व्यवस्था अवश्य करें। स्वास्थ्य संबंधी किसी भी आपात स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि तत्काल चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करें।

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