उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। ग्रीनपार्क का मैदान पांच अक्तूबर से नन्हे कदमों की धमक से गूंजेगा। कोई बैडमिंटन रैकेट थामेगा तो कोई फुटबाल के पीछे दौड़ लगाएगा। कोई ट्रैक पर छलांग लगाकर अपनी प्रतिभा दिखाएगा तो कोई तैराकी, जिम्नास्टिक और कराटे में दमखम दिखाएगा। खेलों के इस उत्सव में लक्ष्य सिर्फ पदक जीतना नहीं, बल्कि भविष्य के चैंपियन तलाशना है। कानपुर ओलंपिक संघ की ओर से पांच से 10 अक्तूबर तक ग्रीनपार्क में होने वाले बेबी गेम्स-2026 की थीम भी इसी सोच पर आधारित है—‘आज का प्रतिभागी, 2036 में भारत का प्रतिनिधि।’
शनिवार को कैंट स्थित कानपुर क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में ओलंपिक संघ के रजत आदित्य दीक्षित ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य बच्चों को छोटी उम्र से ही खेलों से जोड़ना है। आयोजकों की कोशिश है कि खेल मैदान में पहला कदम रखने वाले बच्चे आगे चलकर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी बनें। इसके लिए प्रतियोगिता के साथ बच्चों में खेल के प्रति रुचि और आत्मविश्वास विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
25 खेलों में दिखेगा नन्हों का हुनर
बेबी गेम्स में बच्चों को अपनी पसंद का खेल चुनने के लिए 25 खेलों का मंच मिलेगा। एथलेटिक्स, फुटबाल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, साइकिलिंग, स्केटिंग, कराटे, योग, तीरंदाजी, जूडो, जिम्नास्टिक, ताइक्वांडो, तैराकी, हैंडबाल, बाक्सिंग, रस्साकशी, भारोत्तोलन, मिनी गोल्फ, बास्केटबाल, क्रिकेट और वालीबाल समेत विभिन्न खेलों में बच्चे प्रतिभा दिखाएंगे।
प्रतियोगिता में तीन आयु वर्ग बनाए गए हैं। इनमें तीन से साढ़े चार वर्ष, साढ़े चार से साढ़े छह वर्ष और साढ़े छह से साढ़े आठ वर्ष तक के बच्चे शामिल होंगे। देशभर के बच्चे इसमें हिस्सा ले सकेंगे। प्रतिभागियों के लिए आनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
नन्हे विजेताओं को मिलेंगे खास सम्मान
प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को गुरु गोबिंद सिंह जी के सबसे छोटे पुत्र सरदार फतेह सिंह की स्मृति में ‘सरदार फतेह सिंह खेल सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। वहीं सर्वश्रेष्ठ बालिका खिलाड़ी को कानपुर की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में सम्मानित किया जाएगा।
तीन अक्तूबर से कानपुर और लखनऊ में सहायता केंद्र भी शुरू किए जाएंगे। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी और खेल जगत की हस्तियां पहुंचकर नन्हे खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाएंगी। ऐसे में ग्रीनपार्क में होने वाला बेबी गेम्स केवल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि उन नन्हे खिलाड़ियों के सपनों की पहली सीढ़ी बनेगा, जिनकी नजर अभी से 2036 के बड़े मंच पर है।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर