उत्तर प्रदेश (दैनिक कर्मभूमि) अंबेडकर नगर संविदा और स्थाई विभागीय कर्मियों की अगर तुलना की जाये तो धन कमाई में कर्मियों का कोई सानी नहीं है। जिले के बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय में कर्मी के रूप में तैनात एक लिपिक ने अल्प काल में ही करोड़ों की सम्पत्ति अर्जित कर लिया है, जो चर्चा का विषय है। इस लिपिक द्वारा अकबरपुर टाण्डा सड़क मार्ग पर पुलिस लाइन के सामने एक हवेली जैसा विशाल आवास बनवाया गया है, जिसमें सुख-सुविधा के हर साधन मौजूद हैं।
इस आधुनिक हवेली के अलावा लिपिक के पास बेनामी करोड़ों की चल-अचल सम्पत्ति होना बताया जा रहा है। दो पहिया से लेकर अपार सम्पतियों का स्वामी बेसिक शिक्षा विभाग के जिला कार्यालय मे लिपिक के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहा है। जिला स्तरीय अधिकारियों से लेकर विभागीय उच्चाधिकारियों और सत्ता पक्षीय माननीयों, जिले के प्रभावशाली लोगों से प्रगाढ़ सम्बन्ध बनाकर यह लिपिक निर्भय होकर निर्बाध रूप से धन कमाई में जुटा हुआ है।
बेसिक शिक्षा स्तरीय विद्यालयों की मान्यता सम्बन्धी कार्यों हेतु इस कर्मी द्वारा पत्रावली या अन्य अभिलेख तभी आगे बढ़ाये जाते हैं जब इसके द्वारा नियत की गई धनराशि जरूरतमन्द द्वारा अदा कर दी जाती है। अन्यथा की स्थिति में कार्य सम्पादन में विलम्ब कर दिया जाता है। और तरह-तरह की कमियां निकालते हुए इस सिद्धहस्त लिपिक द्वारा मान्यता आवेदकों को टरकाया जाता है। उसके इस टरकाऊ नीति से बचने के लिए जरूरतमन्द लोग मुँह मांगी चढ़ावे की धनराशि बिना विलम्ब किये ही चढ़ा देते हैं।
इसी जिले के आलापुर तहसील के रामनगर निवासी बेसिक शिक्षा विभाग में लिपिक के रूप में तैनात सत्य प्रकाश मौर्या (42) की कारगुजारी चर्चा का विषय बनी हुई है। कतिपय पत्रकारों द्वारा सोशल मीडिया के जरिये बेसिक शिक्षा विभाग के लिपिक सत्य प्रकाश मौर्या से सम्बन्धित खबरें वायरल की जाने लगीं। वायरल खबरों में लिखा गया है कि सत्य प्रकाश मौर्या (जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय, अम्बेडकरनगर) के चल-अचल सम्पत्ति की जाँच उच्च स्तरीय तटस्थ एजेन्सी द्वारा कराई जानी चाहिए। साथ ही इनके द्वारा विद्यालयी मान्यता सम्बन्धी कार्यों हेतु की जाने वाली धन उगाही की जाँच भी कराई जाये।
रिपोर्ट- विमलेश विश्वकर्मा अंबेडकर नगर
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