उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) जौनपुर।अनुदानित महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना व पूर्व में स्थापित विश्वविद्यालयों के समान वित्तपोषण को लेकर जनहित याचिका(167/2021) की गई थी, जिसमें माननीय उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि शिक्षक संगठनों के प्रत्यावेदन को 3 माह के भीतर विधिसंगत रुप से निस्तारित करें।वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ विजय कुमार सिंह ने माननीय न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि अब प्रदेश सरकार को नए राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना व पूर्व से स्थापित राज्य विश्वविद्यालयों के बंटवारे तथा समान वित्तपोषण को लेकर निश्चित रूप से ठोस नीति बनानी होगी।वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जो बंटवारे के बाद आर्थिक संकट की स्थिति में आता उसे एक बड़ी राहत मिली है तो वहीं दूसरी तरफ आजमगढ़ राज्य विश्वविद्यालय के समान वित्त पोषण का इंतजाम भी राज्य सरकार को करना होगा। जनहित याचिका दायर करने वाले शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ विजय प्रताप तिवारी ने बताया कि माननीय न्यायालय ने प्रदेश सरकार द्वारा मनमाने ढंग से राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना व बंटवारे पर शिक्षक संगठनों की आपत्ति को गंभीरता से लेते हुए यह निर्देश दिया है। न्यायालय के इस निर्णय से प्रदेश सरकार को झटका लगा है और उसे संवैधानिक सीमा में रहते हुए विधिक एवं न्यायोचित रूप से राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके सामान वित्तपोषण व बंटवारे पर नीति बनानी होगी।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय अपने स्थापना काल से लेकर अब तक तीसरी बार टूटने जा रहा है। यदि आजमगढ़ राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना हुई तो पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध आजमगढ़ और मऊ जनपद कट जाएंगे और वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय आर्थिक रूप से जर्जर हो जाएगा। राज्य विश्वविद्यालयों की स्थापना और उनके सामान वित्तपोषण की मांग को लेकर पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षक संगठनों व कर्मचारी संगठनों ने लगातार प्रदेश सरकार से प्रत्यावेदन देकर मनमाने ढंग से पूर्वांचल विश्वविद्यालय के बंटवारे का विरोध कर रहे थे। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय स्ववित्तपोषित शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ अनुराग मिश्र ने कहा कि प्रदेश सरकार वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को एक रुपए की भी आर्थिक मदद नहीं देती, बावजूद इसके आजमगढ़ विश्वविद्यालय को बनाने के नाम पर इस विश्वविद्यालय से जबरन दबाव बनाकर 100 करोड़ रुपए की मांग की तथा पचास करोड़ रुपए की पहली किस्त वसूल भी ली। न्यायालय के इस निर्णय से वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है ,क्योंकि यदि प्रदेश सरकार मनमाने ढंग से पूर्वांचल विश्वविद्यालय को यदि एक बार पुनः तोड़ देती तो यहां शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ जाते।
रिपोर्टर एडिटर अभिषेक शुक्ला उत्तर प्रदेश
You must be logged in to post a comment.