उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,07 मार्च 2021 देश की आधी आबादी स्वास्थ्य की गंभीर चुनौतियाँ का सामना कर रही है इसलिए देश के निर्माण एवँ विकास में उनकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है जिससे देश का विकास प्रभावित होता है। यह विचार जनस्वास्थ्य से जुड़े वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ अनुरूद्व वर्मा ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर व्यक्त किये हैं। उन्होंने बताया कि देश लगभग 50 प्रतिशत महिलाएँ महिलाएँ एवं बालिकाएँ एनीमिया से पीड़ित हैं। यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों की ज्यादातर महिलाएँ कुपोषण एवँ कम वजन का शिकार हैं स्थिति यह है कि दुनिया में मातृत्व के दौरान होने वाली मौतों में 20 प्रतिशत मौतें सिर्फ भारत में होती है तथा 25 फीसदी बेटियाँ अपना 15 वां जन्म दिवस नही मना पाती हैं। उन्होंने वताया कि देश की महिलाओं की बड़ी संख्या हृदय रोग, सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर, डिप्रेशन, स्किजोफ्रीनिया, ऑस्टियोपोरोसिस, टीबी, यूटीआई, कुपोषण, कम वजन, खून की कमी, डायबिटीज, निमोनिया, एच आई वी, एड्स, शहरों में मोटापा आदि का शिकार हैं जिन्हें आसानी से रोका जा सकता है परंतु उनके स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान नहीं दिया जाता है। उन्होंने बताया कि ज्यादा तर स्वास्थ्य सेवाएँ शहरी क्षेत्रों में केंद्रित हैं इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएँ उनकी सुविधाएँ नहीं ले पाती हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं की ज्यादातर बीमारियों को कुछ सावधानियाँ अपनाकर रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की ज्यादातर स्वास्थ्य समस्याओं को पर्याप्त पोषण, स्वक्षता, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएँ, काम का बोझ कम कर दूर किया जा सकता है और उनकी सेहत को बेहतर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पुरुषों को महिलाओं की सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयाँ महिलाओं की स्वास्थ्य रक्षा मे बेहतर कारगर साबित हो सकती है इसलिये उनकी सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
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