उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,27 मार्च 2021 लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला के अन्तर्गत आयोजित लोक चौपाल में आपदा, लोक जीवन और त्योहार विषयक परिचर्चा हुई। शनिवार को आनलाइन हुए कार्यक्रम में जहां लोगों ने विषयाधारित विचार रखे वहीं कविता पाठ व पारम्परिक फाग गीतों से चौपाल गुलजार हुई। संगीत विदुषी प्रो. कमला श्रीवास्तव व वरिष्ठ साहित्यकार डा. विद्याविन्दु सिंह ने चौपाल चौधरी के रूप में अपने मन्तव्य दिये। साहित्यकार डा. सुरभि सिंह ने कहा कि त्योहार लोक जीवन के प्राण वायु हैं और इनसे ही हमारी संस्कृति सनातन प्रवाह के साथ बह रही है। उन्होंने कहा कि त्योहार मनाने की प्रवृति और उत्साह शाश्वत है। परिवार में कोई अनहोनी हो तो भी अवसाद व दुःख कम करने में यही प्रवृति काम करती है। पिछले एक वर्ष से कोरोना के कहर की चर्चा करते हुए कहा कि प्रतिकूलताओं में भी हमने उत्साह के साथ उत्सव मनाये। लोक विदुषी डा. विद्याविन्दु सिंह ने त्योहारों को लोक जीवन की सहचरी बताते हुए फाग के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। नवयुग कन्या महाविद्यालय के हिन्दी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. अपूर्वा अवस्थी ने सावधानी के साथ त्योहार मनाने की अपील करते हुए कहा कि आपदाएं तो हमेशा आती रही हैं लेकिन त्योहार और पर्व की महत्ता कम नहीं होती। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. करुणा पांडे ने देवर के संग होली खेल भाभी है इठलाय जैसे फागुनी दोहे तथा गीतकार सौरभ कमल ने मोरे सैंया रिसाय गए होली मा सुनाया। लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि इस अवसर पर पारम्परिक होली गीत और उन्हीं पर आधारित नृत्य की प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. कमला श्रीवास्तव ने अबीर गुलाल भरे झोली चलो सखी खेलें कन्हैया संग होली से की। श्रेया बिन्दल ने रंग डारुंगी नन्द के लालन पे, रिद्धिमा श्रीवास्तव ने होलीया में उड़े रे गुलाल, कनिष्का श्रीवास्तव ने पिया आइल बसन्ती बहार तथा स्वरा त्रिपाठी ने लाल चुनरी पर रंगवा लहर मारे पर मनमोहक नृत्य किया। मधु श्रीवास्तव ने मत मारो दृगन की चोट रसिया, पूनम त्रिवेदी ने राजा दशरथ द्वार मची होरी, गौरव गुप्ता ने होरी खेलैं रघुबीरा अवध मा, अंजलि सिंह ने जमुना तट श्याम खेलैं होरी, रेखा अग्रवाल ने होरी को हुरदंग मचो री, विभा श्रीवास्तव ने आज बिरज में होरी रे रसिया, रुपाली रंजन श्रीवास्तव ने मोरी चुनर में लग गयो दाग री, सरिता अग्रवाल ने मेरो खोय गयो बाजूबन्द रसिया, सुषमा अग्रवाल ने मोपे बरजोरी रंग डारी कान्हा गुइयां, कल्पना सक्सेना ने बिन होरी खेले न जाऊँगी, कंचन श्रीवास्तव ने होली खेलूँ तो कैसे खेलूँ सखी, अपर्णा सिंह ने मतवारो फागुन आयो री मतवारो, मंजू श्रीवास्तव ने भोले शंकर खेलैं होरी सुनाया। पुणे की सुधा द्विवेदी व एडवोकेट मधु श्रीवास्तव ने भी होरी गीत गाये। सुश्री आस्था सिंह ने सभी को होली की शुभकामनायें दीं। चौपाल में वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी उमा त्रिगुणायत, रीता श्रीवास्तव, साधना मिश्रा ‘विन्ध्य’, डॉ. भारती सिंह, शशि चिक्कर, डॉ. एस.के.गोपाल आदि ने भाग लिया।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
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