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निरंतर कठोर परिश्रम करने वाले विद्यार्थी निश्चित सफलता प्राप्त करते हैं हिमांशु नागपाल

उत्तर प्रदेश (राष्ट्रीय दैनिक कर्मभूमि)जौनपुर

 

 

जौनपुर।तिलकधारी महाविद्यालय में आइक्यूएसी के तत्वाधान में छात्रों के लिए प्रेरणात्मक व्याख्यान शुक्रवार को आयोजित किया गया था। उक्त अवसर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम सदर हिमांशु नागपाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि निरंतर कठोर परिश्रम करने वाला विद्यार्थी निश्चित रूप से सफलता प्राप्त करता है। आजकल देखा जा रहा है कि विद्यार्थी परीक्षा निकट आने पर ही पढ़ाई करते हैं किंतु जो विद्यार्थी निरंतर पढ़ाई में सन्नद्ध रहते हैं, उन्हें सफलता जरूर मिलती है। निरंतर परिश्रम सफलता की कुंजी है। हिमांशु ने कहा कि दुनिया में कोई भी चीज असंभव नहीं है। आवश्यकता है उसे संभव बनाने के लिए सकारात्मक विचार और उसके अनुसार परिश्रम की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कालेज के प्राचार्य प्रो. आलोक कुमार सिंह ने कहा कि कालेज में ऐसे प्रेरणात्मक उद्बोधन की श्रृंखला प्रारंभ की गई है। इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रत्येक सप्ताह में एक विशिष्ट व्यक्ति का व्याख्यान आयोजित किया जाएगा। महाविद्यालय में इस वर्ष नैक द्वारा निरीक्षण होने वाला है। इसके लिए भी आंतरिक तैयारी चल रही हैं। उन्होंने कहा कि परिश्रम एक ऐसी ताकत है जिसके बल पर हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे और सफलता के बीच में दृढ़ विश्वास से युक्त प्रयास की आवश्यकता होती है। जो व्यक्ति पूर्ण विश्वास के साथ प्रयास करता है वह जरूर सफल होता है। “कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों” के माध्यम से विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वह मन लगाकर सफलता के लिए आगे बढ़ें

बी.एड. विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विनय कुमार सिंह ने कहा कि परिश्रम का कोई शॉर्ट कट नहीं है। यदि सफलता प्राप्त करनी है तो परिश्रम करना पड़ेगा। अंग्रेजी विभाग के प्रो. जी.डी. दुबे ने कहा कि आज के दौर में जीवन बड़ा कठिन है लेकिन हमें कठिनाई से घबराना नहीं है बल्कि डट कर के उसका मुकाबला करते हुए सफलता प्राप्त करना है। यदि हम हिम्मत और दृढ़ विश्वास के साथ प्रयत्न करते हैं तो दुनिया में कोई ऐसी चीज नहीं जो हमें आगे बढ़ने से रोक सके।

कार्यक्रम में बोलते हुए मनोविज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि कोई भी काम बिना प्रेरणा के नहीं होता। धनात्मक प्रेरणा कार्य सिद्धि में सहायक होती है जबकि ऋणात्मक प्रेरणा हमें सफलता से दूर करती है।

कार्यक्रम में अंग्रेजी विभाग के प्रो. बंदना दुबे, प्रो श्रद्धा सिंह डॉ. सुदेश सिंह, डॉ. छाया सिंह, डा विशाल सिंह, डा अवनीश कुमार, डा वेद प्रकाश सिंह , कर्मचारीगण एवम छात्रा छात्राए आदि उपस्थित रहे।

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