ईकेवाईसी नहीं, तो नहीं मिलेगी किसान सम्मान निधि – डीएम

उत्तर प्रदेश दैनिक कर्मभूमि चित्रकूट। जिलाधिकारी अभिषेक आनंद की अध्यक्षता में कृषि विभाग (केसीसी, ईकेवाईसी, एफपीओ, खेत, तालाब आदि) एवं डब्ल्यूसीडीसी की पाक्षिक समीक्षा बैठक जिला कलेक्ट्रेट के सभागार संपन्न हुई। योजनाओं की प्रगति का विवरण प्रस्तुत करते हुए उप कृषि निदेशक राजकुमार ने बताया कि जनपद में 127635 किसानों का भूलेख अंकन हो चुका है। जिनको प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्राप्त हो रही है। इनमें से केवल 100268 किसानों का ही ईकेवाईसी हो पाया है। शासन से निर्देश प्राप्त हुए हैं कि जिन किसानों का ईकेवाईसी नहीं है उनको आगामी किस्त का भुगतान नहीं किया जाएगा। इसलिए सभी किसान भाइयों से अपील है की जिनका भूलेख अंकन हो चुका है वे तत्काल जन सेवा केंद्र पर जाकर ईकेवाईसी करा लें। उप कृषि निदेशक द्वारा कृषि विभाग की अन्य योजनाओं जैसे आत्मा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, कृषक उत्पादक संगठन आदि का विस्तृत प्रगति विवरण प्रस्तुत किया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जो किसान दलहन, मोटे अनाज, सब्जी एवं अन्य किसी उत्पाद की खेती कर रहे हैं उनका विविध कंपनियों से सहमति करा कर उनका व्यापार कराने के लिए एफ पी ओ के माध्यम से एम ओ यू कराएं ताकि किसानों को उनके कृषि उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। मोटे अनाज की खेती को प्रोत्साहन देने व उनके उत्पादों का विपणन करने के गुण सीखने के लिए 50 किसानों का भ्रमण दल हैदराबाद भेजा गया है। इसी प्रकार पशुपालक, मत्स्य पालक व औद्यानिक फसलों के प्रगतिशील किसानों को देश के विभिन्न संस्थानों में भेजे जाने के निर्देश जिलाधिकारी ने संबंधित को दिए। किसान उत्पादक संगठन के संबंध में उन्होंने कहा कि जो सक्रिय नहीं है उन्हें हटा दिया जाए व जो एक्टिव हैं उनको क्या सपोर्ट चाहिए उनसे बात करके उन्हें प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि इसमें और अधिक किसानों को जोड़ें। सीबीसी के पैकेजिंग के संबंध में उन्होंने कहा कि पैकेजिंग से इसकी गुणवत्ता बढ़ेगी और आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आईटीसी को बुलाकर मीटिंग भी कराएं। कहा कि आप लोग समन्वय बनाकर कार्य करेंगे तो आप लोग व किसानों को फायदा होगा। खेत तालाब में 1168 तालाबों में 129 तालाबों का कार्य पूर्ण हो चुका है और तालाबों पर कार्य चल रहा है। परती भूमि विकास विभाग की वाटरशेड विकास परियोजना लेगी मूर्तरूप के अंतर्गत भूमि संरक्षण अधिकारी कर्वी द्वितीय एवं वाटरशेड विकास दल के परियोजना प्रबंधक विमलेश कुमार ने परियोजना की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि जनपद में सहभागिता के आधार पर वाटरशेड विकास परियोजना का क्रियान्वयन वाटरशेड समिति के माध्यम से किया जाएगा। जिसमें किसानों, स्वयं सहायता समूहों, कृषक उत्पादक संगठन शामिल होंगे। इस परियोजना के अंतर्गत जनपद के विभिन्न ग्रामों में आगामी पाँच वर्षों में कुल 5800 हेक्टेयर का क्षेत्रफल प्रस्तावित है। जिनके नियोजन मानचित्र स्वीकृति के प्रक्रियाधीन है। इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी अमृतपाल कौर, कृषि उपनिदेशक राजकुमार, जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला व संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

 

 

*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

जनपद चित्रकूट