पंडित गौरव शास्त्री ने दूर किया भ्रम, नवविवाहित महिलाएं भी परंपरा के अनुसार कर सकेंगी पूजन

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। करवा चौथ पर शुक्रास्त को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पंडित गौरव शास्त्री ने व्रत और पूजन को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि शुक्रास्त के नाम पर महिलाओं को भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। 29 अक्टूबर, गुरुवार को सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के साथ करवा चौथ का व्रत रखेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नवविवाहित महिलाएं अपनी कुल-परंपरा के अनुसार पूजन कर सकती हैं।

शुक्रास्त के नाम पर न हों भ्रमित

करवा चौथ से पहले शुक्रास्त को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कई महिलाएं व्रत के विधान को लेकर असमंजस में हैं। पंडित गौरव शास्त्री ने कहा कि शुक्र और गुरु का अस्त होना खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन इसका प्रभाव प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान पर समान रूप से नहीं माना जाता। इसलिए किसी भी व्रत को लेकर निष्कर्ष निकालने से पहले शास्त्रीय विधान को समझना जरूरी है।

धर्मग्रंथों का दिया हवाला

पंडित गौरव शास्त्री ने निर्णय सिंधु और धर्म सिंधु जैसे धर्मग्रंथों में वर्णित परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि करवा चौथ जैसे वार्षिक व्रत में शुक्रास्त को बाधक मानकर अनावश्यक संशय नहीं करना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों से बचने तथा प्रमाणिक पंचांग और विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन पर भरोसा करने की अपील की।

चांद के दीदार के बाद खुलेगा व्रत

करवा चौथ पर महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना के साथ उपवास रखती हैं। शाम को करवा माता की पूजा और व्रत कथा के बाद चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया जाता है। चंद्रदर्शन के बाद अर्घ्य अर्पित कर पारंपरिक रीति से व्रत खोला जाता है।

नवविवाहिताओं की भी दूर की आशंका

पहली बार व्रत रखने जा रही नवविवाहिताओं को लेकर भी पंडित शास्त्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी कुल-परंपरा और पारिवारिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजन कर सकती हैं। धार्मिक पर्वों को लेकर किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय शास्त्रीय परंपराओं का पालन करना चाहिए।

संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर

Leave a Reply