विश्व जनसँख्या दिवस पर क्या ‌‌‌बोलें ‌‌‌जय प्रकाश मिश्रा

उत्तर प्रदेश ( दैनिक कर्मभूमि) जौनपुर
आज 11 जुलाई विश्व जनसँख्या दिवस(World Population Day )मनाया जाता है.इस दिन को मनाने का उद्देश्य यह है कि दुनियां के प्रत्येक व्यक्ति बढ़ती जनसंख्या को कंट्रोल करने में अपना योगदान अवश्य करें,इस दिन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई क्रियाकलाप किये जाते हैं ,ताकि जनता जागरुक हो सकें और जनसँख्या पर कंट्रोल कर सकें,11 जुलाई को विश्व जनसँख्या दिवस मनाने की शुरुआत 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की संचालक परिषद द्वारा हुई थी.दरअसल 11 जुलाई 1987 तक वैश्विक जनसँख्या का आंकड़ा 5 अरब के भी पार कर चुका था,जिसे देखते हुए वैश्विक हितों को ध्यान में रखते हुए इस दिवस को मनाने और जारी रखने का निर्णय लिया गया.विश्व जनसँख्या दिवस पर जागरूकता फैलाने के लिए कई तरह के कार्यक्रमो का आयोजन किया जाता है ,जिसमे सोशल मीडिया ,विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमो व सभाओं का संचालन ,प्रतियोगिताओं का आयोजन ,रोड शो,नुक्कड़ नाटक अन्य कई तरीके शामिल हैंजिसके माध्यम से जनसँख्या वृद्धि की वजह से होने वाले खतरों के प्रति लोगो को आगाह किया जाता है.2020 का थीम है-दुनियां भर में महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य और अधिकारों की सुरक्षा पर आधारित है आज कोरोना जैसी इस वैश्विक बिमारी से पूरे विश्व की भयावह स्थिति देखकर हृदय कांप उठता है । ऐसी स्थिति में भी कुछ ऐसे तत्व सभी देशों में विराजमान हैं जिन्हें देख कर हम कह सकते हैं कि मानवता दूर दूर तक इनमें छू नहीं गयी है । जहां एक तरफ पूरा विश्व अपने अपने देश की सरकारों के कठिन निर्णय का अनुपालन करते हुए दिखायी दे रहे हैं वहीं कुछ लोग ऐसी विषम परिस्थिति में भी अपनी मन मर्जी का परचम लहराने के लिये उत्सुक दिखायी दे रहे हैं । मेरा अपना निजी मत है कि भारत देश इस त्रासदी से उबरने के उपरान्त कुछ कठिन निर्णय करने पर विचार करे जिससे देश में उत्पन्न होने वाली भीषण तबाही से बचा जा सके । यदि भारतवर्ष ने अपनी बढ़ती हुयी आबादी पर कोई सार्थक विराम नहीं लगाया तो आने वाले 25 वर्षों के उपरान्त जब हम आज़ादी का शताब्दी वर्ष मना रहे होंगे तो देश में भारी आबादी का दंश भी झेल रहे होंगे । हमारे देश की आबादी आज लगभग 138 करोड़ के करीब पहुंच चुकी है, आज़ादी का शताब्दी वर्ष आते आते हम 200 करोड़ के आस पास पहुंच सकते हैं । उस समय न तो हमारे पास खेती के लिये पर्याप्त जमीन शेष रह जायेगी और न ही अच्छे उद्योगों की स्थापना करने के लिये भूमि उपलब्ध हो पाएगी, चारों तरफ आवासीय भवन ही दिखायी दे रहे होंगे ।
मेरा अपना मानना है कि इस त्रासदी के उपरांत सभी राजनैतिक दलों को अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति का परिचय देते हुये उचित निर्णय लेना चाहिये जिससे देश में बढ़ती हुयी आबादी को नियंत्रित किया जा सके । सबसे पहले आरंभ करना पड़ेगा लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा एवं विधान परिषद में उन्हीं व्यक्तियों का नामांकन करने की अनुमति दी जाय जिनके पास दो या दो से कम संतान हैं । दो संतान से अधिक व्यक्ति को किसी भी दशा में नामांकन की अनुमति न दी जाय । कालांतर में इसे नगर निगमों, जिला पंचायतों सहित पंचायत चुनावों में भी लागू किया जाय । परिणाम की सार्थकता को देखते हुये देश में प्रत्येक दंपति को दो संतानों से अधिक न पैदा करने का कानून बनाया जाय । यदि इसका किसी भी दंपति द्वारा अनुपालन नहीं किया जाता है तो उसे सभी प्रकार की शासकीय सुविधाओं से वंचित किया जाना चाहिये । प्रत्येक भारतवासी को इस कानून के अनुपालन की अनिवार्यता / बाध्यता होनी चाहिये ।
मेरे इस सुझाव का देश के सभी राजनैतिक दलों एवं सभी राज्य सरकारों सहित केंद्र सरकार को समुचित विचार करने हेतु समर्पित ।
जय हिन्द जय भारत।।

सादर
जय प्रकाश मिश्रा
मिडिया प्रभारी जौनपुर