धनियामऊ पुल काण्ड में शहीद हो गए थे कई सपूत

उत्तर प्रदेश ( दैनिक कर्मभूमि) जौनपुर
जब धनियामऊ पुल काण्ड में शहीद हो गए थे कई सपूत ————————— देश गुलामी के जंजीरों में जकड़ा हुआ था मां भारती अपनी स्वतंत्रता कि पुकार तेज करतीं जा रही थी उनके सैकड़ों बच्चों अपनी जान हथेली पर परतंत्रता कि बेड़ियों को काट फेंकने के लिए जी जान से लगे संघर्ष कर रहे थे न जाने कितने कितने शहीद हो गए थे और न जाने कितने शहीद होने के राह पर अग्रसर थे मां भारती के पुत्रो को देश की आजादी के शिवा कुछ भी न याद था न भूख न प्रयास न बीबी न बच्चे न परिवार ने घर कुछ भी नहीं याद था याद था केवल मां भारती की आजादी
संघर्ष की ज्वाला समुचे देश में गांधी जी के विचारों तले दहक रही थी उसी समय उत्तर प्रदेश जिला जौनपुर थाना बख्शा ग्राम हैदरपुर में पिता सुखदेव सिंह के दो संतानों में देश की आजादी के सपने हिलोर ले रही थी बड़े संतान जिसे आज दुनिया जमींदार सिंह के नाम से जानती है वह पढ़ाई में कुशल बुद्धि और खेल कुद में काफी रुचि रखते थे उनकी शिक्षा राजा हरपाल सिंह महाविद्यालय सिंगरामऊ में अपने छोटे भाई अमलदार सिंह के साथ चल रही थी राजा साहब कि विषेश स्नेह रहती थी पढ़ाई के साथ साथ हिंदुस्तान की आजादी के सपने हावी होते जा रहे थे अपने दोस्तों के साथ देश के आजादी के बिषय में हमेशा चर्चा करते रहते थे इसी कड़ी जमींदार सिंह पंडित रामनरेश शर्मा अंय लोग मिलकर बदलापुर थाना लुटने का फैसला किया गया तारीख तय की गई 16 अगस्त सन् 1942 आसमान से मुसलाधार बारिश हो रही थी क्रांतिकारी कि एक टुकड़ी पंडित श्री रामनरेश शर्मा के नेतृत्व में बदलापुर कि तरफ रवाना हो गई एक टुकड़ी जमींदार सिंह के नेतृत्व में धनियामऊ पुल तोड़ने में चली गई जिससे बदलापुर थाने के सहयोग के लिए बख्शा थाना न पहुंच सके पर ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था दिन के 2 से 4 के बीच जब क्रांतिकारीयो ने 150 कि संख्या में पुल तोड़ने का काम कर रहे थे तभी थाना बख्शा के इंस्पेक्टर वहा पर फोर्स के साथ पहुंच गये और पुल तोड़ने के लिए मना करने लगें चेतावनी देते हुए सभी अपने घर लौट जाने के लिए कहा इतना सुनते ही सभी क्रांति कारी आग बबूला हो गये और ईंट पत्थर फेंकने लगे इंस्पेक्टर साहब ने हवाई फायरिंग करने लगे कुछ लोग को सुरक्षित स्थान पर चले गए गठीले बदन से जमींदार सिंह ने इंस्पेक्टर पर टुट पड़े हाथ मुक्के और पैरों से इंस्पेक्टर को मारने लगे इंस्पेक्टर को जमींदार सिंह ने जमीन पर उठाकर पटक दिए इंस्पेक्टर ने अपनी बंदूक तान कर जमींदार सिंह के डाढी में गोली मार दिया मां भारती का यह सपुत हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगा कर हमेशा हमेशा के लिए शहीद हो गए उनके तमाम साथियों को अगरौरा ग्राम में बबूल के पेड़ के बांध कर गोली मार दिया गया और उनकी लाशें कई दिनों तक पेड़ों पर लटकी हुई मिली ‌अंय शहीद रामानंद रघुराम राम आधार राम पदारत और राम निहोर कहार मुख्य थे 16 अगस्त सन् 1942 में जमींदार सिंह दसवीं पास करके ग्यारहवीं में प्रवेश किए थे महज 16 से 17 वर्ष के थे जल्दी ही उनका विवाह श्रीमती प्रभु देवी जी के साथ हुआ था जिसके गर्भ में महज केवल तीन माह का बच्चा पल रहा था जन्म के पश्चात् उनका नाम क्रांति प्रताप सिंह रखा गया अंग्रेजों के दमन कारी कार्यो के चलते शहीद जमींदार सिंह के छोटे भाई बीच में अपनी पढ़ाई छोड़कर मुम्बई जाना पड़ा बड़ी कड़ी मेहनत के साथ बाद में देश आजाद हुआ आजादी के पश्चात् अपनी कड़ी मेहनत और परिश्रम के बाद आगे चलकर भारतीय संघ मजदूर के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भारतीय रेलवे संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये क्रांति प्रताप सिंह जय हिन्द इंटर कालेज में प्रवक्ता सेनावृति हुए एवं समाज सेवा करते हुए 69 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया क्रांति सिंह जी के भतीजे जय सिंह वर्तमान समय मे मुम्बई में रेलवे विभाग में सेवा कर रहे हैं शहीद जमींदार सिंह के पपौत्र डाक्टर प्रभात विक्रम सिंह अपने क्लीनिक के माध्यम से समाज सेवा में लगे हैं साथ ही साथ हर गरीब मजदूर को साथ लेकर चलने और सबके सुख दुःख में हिस्सा लेते रहते हैं सत्य,धर्म,न्याय के पालनहार है डाक्टर प्रभात विक्रम सिंह जी कि लोकप्रियता और मधुर वचन सबको मन मुग्ध कर देता है।

डाक्टर प्रभात विक्रम सिंह हैदरपुर बख्शा जौनपुर