उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,14 फरवरी 2021 हिमाचल प्रदेश से भूतपूर्व संसद एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के गवेर्निंग बॉडी के सदस्य सुरेश चंदेल आज भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ का भ्रमण किया। इस अवसर पर उन्नोंहने संस्थान की तकनीकों को देखा तथा संस्था के निदेशक डॉ. अश्विनी दत्त पाठक तथा सभी विभागाध्यक्षों एवं वैज्ञानिकों के साथ चर्चा बैठक की। शुरुवात में निदेशक डॉ. पाठक ने श्री चंदेल का औपचारिक स्वागत करते हुए संस्थान की शोध, तकनीक तथा प्रसार उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। संस्थान द्वारा विकसित किस्मों, बुवाई विधियों, अन्य तकनीकों पर विस्तारपूर्वक प्रस्तुति देते हुए डॉ पाठक ने बताया कि पिछले कुछ दशकों में संस्थान द्वारा विकसित तकनीकों का पूरे देश में लगभग 25-30 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों द्वारा प्रयोग में लाया जा रहा है जिससे किसानों के साथ साथ चीनी उद्योग को भी आर्थिक लाभ हुआ है। बैठक में श्री चंदेल ने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अब समय आ गया है कि किसानों के पारंपरिक ज्ञान को शोध कार्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। एकल फसल पद्धति की जगह विविधिकरण पर जोर दिया जाए। गन्ना रस को पेय के रूप में बोतलों, टेट्रा पैक इत्यादि में किस प्रकार जन मानस को वर्ष भर उपलब्ध कराया जाए इस पर गन्ना शोध की प्राथमिकता होनी चाहिए। सीमांत एवं छोटे किसानों के लिए लाभकारी गन्ना उत्पादन पद्धति तथा गन्ना रस एवं गुढ़ उत्पादन इकाई वृहत स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध हो, इस क्षेत्र में वैज्ञानिकों से कार्य करने का अपील किया। इस संदर्भ में हिमाचल प्रदेश के छोटे किसान हरीमन के सफल प्रयास का उदाहरण देते हुए बताया की श्री हरीमन के अथक प्रयास से सेब की खेती अब पहाढ़ी क्षेत्रों के अलावा मैदानी क्षेत्रों में भी संभव हो पाया है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रसार कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार साह ने संस्थान के विभिन्न प्रसार एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम को रेखांकित करते हुए बताया की प्रत्येक वर्ष संस्थान 40000-50000 कुंतल स्वस्थ गन्ना बीज किसानों के खेतों में उत्पादन कर रह है और इससे किसानों की आमदनी 70000 रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 1.50 लाख रुपए हो गया है। गन्ना के साथ विभिन्न दलहनी, सब्जियों, मशाले की अन्तः फसली खेती को किसानों के बीच प्रदर्शित कर उनको जागरूक किया गया और अब वे 4.0 से 5.0 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर सुद्द लाभ अर्जित कर रहे हैं। बैठक के अंत में डॉ साह ने अतिथि के साथ सभी वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
You must be logged in to post a comment.