उत्तर प्रदेश दैनिक कर्मभूमि वाराणसी
सबसे धनी साहित्य समाज निकला, ड़ॉ सत्या होप टॉक का शिक्षा अभियान गति पकड़ा
जौनपुर।वैज्ञानिक पहल की उपज, साहित्य सम्मान कार्यक्रम के तीसरे भाग-बसंत में कुछ नए और कुछ पुराने कवियों के साथ कवि के साथ कॉफी कार्यक्रम का आयोजन हुआ. अपनी रचनाओं के साथ आदरणीय श्री धर द्विवेदी जी , श्रीमती क्षमा द्विवेदी, श्रीमती रश्मि लता मिश्रा जी, श्रीमती उमा शर्मा उमंग, श्रीमती झरना माथुर, डॉक्टर सूर्यनारायण गौतम जी , कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी जी , रश्मि सक्सैना, रश्मि खंडेलवाल, मयंक मणि दुबे, मंजू गुप्ता, ज्ञानेंद्र शुक्ला, ड़ॉ राजकुमार शर्मा, ड़ॉ अंगद धारिया, शिवार्चन शुक्ल, राम कथा नागर, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मान प्राप्त सत्यनारायण जी, रघुकुल यथार्थ, शिव मणि त्रिपाठी, मोहन लाल सिंह जी तथा सुभाषिनी गुप्ता जी ने भाग लेकर शिक्षा के लिए उठाए गए संकल्प को पुनः दोहराया. अपने सुंदर साहित्य की रचना के माध्यम से डॉक्टर ममता वार्ष्णेय जी ने बसंत महोत्सव के आखिरी दिन प्रेरणा दी. साहित्य चर्चा औऱ काव्य पाठ के माध्यम से समाज को संस्कारित करने का यह प्रयास ड़ॉ सत्य प्रकाश जी, जो काशी हिंदू विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक हैं, का एक अभियान बनेगा, ऐसा सभी का मानना है. शिक्षा के लिए उठाए इस कार्य को करने के लिए बहुत सारे कवियों ने आजीवन सदस्यता लेकर इस संकल्प के साथ अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया है. 14 मार्च से 28 मार्च तक होलिकोत्सव कार्यक्रम के माध्यम से “जीवन को रचने वाली कविताएं” जैसी श्रृंखला लेकर आ रहे हैं. इस कार्यक्रम हेतु डॉ सत्या होप टॉक के मंच से व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कोरोना महामारी समय काल में पूरे 1 वर्ष चले शिक्षा अभियान को प्रासंगिक बनाने के लिए 101 कवियों का समर्थन माँगा गया है. बहुत सारे कवियों ने अपनी व्यक्तिगत समर्थन उपस्थित करा दिया है. देश की शिक्षा व्यवस्था में ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से यह सबसे बड़ी काव्य गोष्ठी मानी जाएगी, जिसमें 15 दिनों तक अनवरत जीवन को संस्कारित करने वाली कविताओं के माध्यम से समाज को प्रेरणा दी जाएगी. ज्ञात हो की सर्व शिक्षा अभियान के लिए मीट कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को शिक्षा की भिक्षा कार्यक्रम के लिए प्रेरणा औऱ ट्रेनिंग दी जा रही है. डॉक्टर सत्य प्रकाश का कहना है कि समाज का हर व्यक्ति शिक्षित हो, इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षक बनना पड़ेगा
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