उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,12 मार्च 2021 उत्कर्ष संगोष्ठी के 20वें चरण में राज्य एवं केंद्रीय स्तर के कई संगठनों के मुख्य पदाधिकारी मौजूद रहे। शुक्रवार को राणाप्रताप मार्ग स्थित तरुष कांफ्रेंस हाल में सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण विषय पर आधारित इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए अनुसूचित जाति जनजाति कोआर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय संयोजक इंद्रपाल सोनकर ने कहा कि देश के प्राकृतिक संसाधनों को कुछ निजी कंपनियों के हाथों में सौंपने का प्रयास इस देश में करोड़ों लोगों को बेसहारा और बेरोजगार बना देगा।यह स्थिति एक लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र को खत्म करने जैसी है।प्राथमिक शिक्षकों की प्रतिनिधि वक्ता के रूप में बोलते हुए रीना त्रिपाठी ने बताया कि अब शिक्षा के निजीकरण की प्रक्रिया भी चल रही है जिसका नतीजा यह निकलेगा कि गरीबों के बच्चे शिक्षा के संवैधानिक अधिकार से वंचित रह जायेंगे।राज्य विद्युत परिषद में जूनियर इंजीनियरों के सबसे बड़े संगठन के नेता जीबी पटेल ने बताया कि सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण डा.अंबेडकर के संविधान में दिये गये मौलिक अधिकारों और महात्मा गाँधी के सत्याग्रह के समय देखे गये सपनों को नष्ट कर देने का षड्यंत्र है।आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि देश की जनता की संपत्ति को औनेपौने दामों पर निजी हाथों में देना न केवल देश की सामाजिक संरचना को अस्तव्यस्त कर देगा बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारी खतरे पैदा करेगा। शैलेंद्र दुबे ने कहा कि एक तरफ देशवासियों की आर्थिक स्वतंत्रता को दाँव पर लगाने का षड्यंत्र चल रहा है और दूसरी तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में स्वतंत्रता का अमृत उत्सव मना रहे हैं। उत्तर प्रदेश किसान सभा के सदस्य मोहम्मद ओसामा ने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण उन सारे महान भारतीय विचारकों और दार्शनिकों का अपमान है जो समाजवाद की मौलिक अवधारणा को भारत के विकास का आधार मानते थे।यूनियन बैंक पदाधिकारी कामरेड धर्मेंद्र अवस्थी ने बताया कि जिन सार्वजनिक उपक्रमों के आधार पर भारत की संपूर्ण विकास यात्रा सत्तर साल से टिकी रही है,उस आधार को ही नष्ट करने का ही प्रयास निजीकरण के माध्यम से किया जा रहा है।संगोष्ठी के दूसरे सत्र में समाजवादी पार्टी के युवा नेता असगर अंसारी ने मौजूद वक्ताओं को बताया कि एक ईस्ट इंडिया कंपनी ने देश में व्यवसाय के लिये प्रवेश किया था और हमारे देशवासियों को गुलाम बना लिया था।मौजूदा भाजपा सरकार फिर उसी गुलामी की दिशा में देश को धकेल रही है जिसका विरोध करने के लिये समाजवादी पार्टी के लाखों युवा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सड़कों पर उतर कर संघर्ष के लिये तैयार हैं।आदर्श संग्राम पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष गौतम भारती ने कहा कि हर देशभक्त राष्ट्रवासी को सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध करना चाहिये तभी इस देश को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले किये जाने के राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों का मुकाबला किया जा सकेगा।भारत जनगौरव मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रेश शुक्ला ने कहा कि मौजूदा भाजपा सरकार के मानसिक गुरु गोलवलकर ने अपनी एक किताब में देश के सारी संपत्ति को पाँच प्रतिशत हाथों में देकर चंद गुलामों के माध्यम से निरंकुश शासन करने की युक्ति सुझायी थी और मौजूदा सरकार उसी रास्ते पर चल रही है।आदर्श संग्राम पार्टी के सलाहकार अमित कुमार सिंह ने मौजूदा केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार के पास सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में देने की वैधानिक नीति क्या है,इसे सरकार को तत्काल सार्वजनिक करना चाहिये। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए इलाहाबाद बैंक के पूर्व उपमहाप्रबंधक नित्यानंद दुबे ने बताया कि विगत 7वर्षों में भारत सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है जो सबसे बड़ा संकट है और सरकार लगातार भ्रमपूर्ण फैसले लेती जा रही है जिसका नतीजा भारत के बैंकों की बर्बादी के रूप में देखा जा सकता है। संगोष्ठी मध्याह्न 2बजे से शुरू होकर देर शाम तक चलती रही। आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित इस संगोष्ठी का संचालन जाहिद अली ने किया।संगोष्ठी के उपरांत आयोजक संस्था उत्कर्ष लखनऊ से जुड़े अनिल तिवारी ने बताया कि संगोष्ठी का अगला चरण 20 मार्च को संपन्न होगा।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
You must be logged in to post a comment.