उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय(दैनिक कर्मभूमि)चित्रकूट श्री राम की तपोस्थली कामतानाथ पर्वत में बिहारा ग्राम पंचायत पेरा तीर के हनुमान मंदिर परिसर रामेश्वर भोलेनाथ मंदिर में आयोजित श्री राम कथा में कथा व्यास नवलेश दीक्षित ने कहा कि भगवान संदेश देते हैं कि सदैव बड़ों से पूछ कर आगे बढ़ें। तुलसीदास कहते हैं कि भगवान ने वनवास को आत्मसात कर लिया है। देवलोक की तरह कुटी में रह रहे हैं। जीवन मे साधन से सुख नही मिलता है। नवलेश दीक्षित कहते हैं कि निषादराज गुह्य की भगवान यमुना तट से विदा करते हैं। वापस आकर देखते हैं कि सुमंत गंगा किनारे बैठे एकटक दक्षिण दिशा को निहार रहे हैं। समझा कर उन्हें अयोध्या भेजते हैं। सुमंत विलखते हुए अयोध्या
पहुंचते हैं। सोचते हैं कि कैसे महाराज को मुह दिखाऊंगा। इधर महाराज दशरथ की दशा खराव है। प्राणहीन जैसे पड़े हैं। सुमंत के आने की सूचना पाकर महाराज उठ बैठे। मेरे राम कहां हैं। सुमंत पूरी बात बताते हैं। दशरथ के प्राण कंठ में अटक जाते हैं। कौशल्या संभालती हैं। दशरथ श्रवण की मृत्यु और शाप की बात रानियों से बताते हैं। दशरथ छः बार राम कह प्राण त्याग दिए। नवलेश दीक्षित कथा व्यास कहते हैं जीयत मरत दशरथ जस जीयत राम…राम विरह करि यही मनुष्य के जीवन का परम लक्ष्य है। दीक्षित ने कहा कि लोग सोचते है कि मरे के समय राम बोल देंगें। प्रश्न करते है, कहो पता बा कहिहा मरे के बा। कहा कि सावधान! हम अच्छे है, यह ठीक है, लेकिन हम ही अच्छे हैं, यह बहुत बुरी बात है। सबकुछ भगवान को सौंप दीजिए अर्थात कर्तव्य का पालन किया जाय, धर्म सम्मत कर्तव्य का परिणाम अच्छा ही होगा। कथा के आयोजक भोले राम शुक्ला मुख्य यजमान रमेश शुक्ला व उनकी धर्मपत्नी हीरामणि कथा सुनने के लिए कई ग्राम पंचायतों से पहुंचे श्रद्धालु बाबूलाल पांडे,अरुण त्रिपाठी पूर्व प्रधान खोही, श्यामलाल दुबे दी सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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