*टांडा में बिना मान्यता के संचालित विद्यालयों पर कसा शिकंजा लगाया जा सकता है एक लाख का जुर्माना*

अंबेडकरनगर (टांडा) एक बार फिर से मान्यता विहीन विद्यालयों को चिह्नित करने के लिए अभियान शुरू किया गया है। बिना मान्यता के स्कूल चलाने वालों पर एक लाख रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा। बेहतर पढ़ाई के नाम पर बिना मान्यता के शहर में कुछ स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों के हौंसले इतने बुलंद हैं कि वह बिना मान्यता के कई सालों से बच्चों की उत्तम पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों से मोटी फीस वसूल रहे हैं। योगी सरकार द्वारा बिना मान्यता विद्यालय के बंद करने के आदेश बाद क्षेत्र में बिना मान्यता संचालित कुछ विद्यालयों में हड़कंप मच गया है और कुछ विद्यालयों पर बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्यवाही शुरू कर दी है। बीएसए ने सभी शिक्षा क्षेत्रों के बीईओ को स्कूलों की जांचकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।इसी क्रम में शिक्षा क्षेत्र टांडा के खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा टांडा नगर अंतर्गत 5 विद्यालयों को बिना मान्यता संचालन हेतु चिन्हित कर उन्हें विद्यालय बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है। तथा वहां के बच्चों को समीपवर्ती विद्यालयों में नामांकन कराने हेतु निर्देश दिया गया। निम्न विद्यालयों के ऊपर कार्यवाही की गई है *एम्बिशस एजुकेशनल एकेडमी सकरावल* टाण्डा  जो कक्षा 1 से 5 तक संचालित है मान्यता नहीं है,*डी०एस. प्ले वे इंग्लिश एकेडमी* टाण्डा कक्षा 6 से 8 तक संचालित है  मान्यता नहीं है । *राजकुंवर पब्लिक स्कूल*- टाण्डा कक्षा 1 से 8 तक संचालित है मान्यता नहीं हैं।*बलभद्र प्रसाद सदाव्रती प्राथमिक विद्यालय टाण्डा* कक्षा 6 से 8 तक संचालित है मान्यता नहीं है।*मदरसा मदनी तहफीजुल कुरान अलहदादपुर टांडा* कक्षा 1 से 5 तक संचालित है।इस विद्यालयों को खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा नोटिस दिया गया है और कहा किया गया है कि विद्यालय बंद कर वहां के बच्चों का प्रवेश निकटवर्ती परिषदीय या मान्यता प्राप्त विद्यालय में कराकर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को सूचित करे।अन्यथा विभागीय कार्रवाही के लिए तैयार रहे।उन्होने कहा कि कोई भी बिना मान्यता विद्यालय क्षेत्र में चलने नहीं दिया जाएगा।और सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार कुछ विद्यालय नियमों के विपरीत बच्चों को शारीरिक और मानसिक प्रताडना देते हैं*शिक्षा का अधिकार अधिनियम* के अंतर्गत किसी भी स्कूल द्वारा 25 प्रतिशत सीट गरीब वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखी जाती है।लेकिन यह नियम अब कानून की किताबों में ही शोभा देने लगा है। जमीनी तौर पर इसका पालन न के बराबर किया जा रहा है। न ही कोई जिम्मेदार इस नियम का पालन करवाने में सक्षम है। टांडा क्षेत्र ही नही अपितु पूरे अम्बेडकर नगर जनपद में संचालित किसी भी प्राइवेट विद्यालय में गरीब बच्चों की शिक्षा का कोई इंतजाम नहीं है उनसे भी डरा धमका कर भरपूर फीस वसूली जाती है। तथा विद्यालयों में पढ़ाई के नाम पर 800 से 1000 रूपए में अप्रशिक्षित अध्यापकों से अध्यापन कार्य करवाकर बच्चों के भविष्य साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।इस पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं जा रहा है।खासकर नामी स्कूलों में तो शिक्षा अधिकारी झांकने की भी हिम्मत तक नहीं जुटा पाते इसी की आड में विद्यालय अपनी मनमानी करते हैं।

रिपोर्ट-विमलेश विश्वकर्मा ब्यूरो चीफ अंबेडकरनगर

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