चित्रकूट: विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर दिब्यांग विश्वविद्यालय में मुख्य अतिथि कुलसचिव आर पी मिश्र और विशिष्ट अतिथि डा विनोद मिश्र, डा महेंद्र उपाध्याय द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में कुलसचिव आर पी मिश्र ने कहा कि हिन्दी हमारी धर्म, संस्कृति की धरोहर है। हिन्दी साहित्य बहुत ही सरल भाषा है। पूरे विश्व में हिन्दी संघ सरकार की आधिकारिक भाषा होगी। इसी निर्णय को लागू करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में प्रासंगिक करने के उद्देश्य से सन 1953 से पूरे भारत में 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दी दिवस मनाया जा रहा है। भारत के स्वत्रंत्रता संग्राम मे हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने घोषित किया था कि हिंदी साहित्य में सभी गुण विधमान हैं। स्वत्रंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी साहित्य को आधिकारिक भाषा बनाने में महत्वपूर्ण योगदान काका कालेलकर, हजारी प्रसाद दिवेदी, सेठ गोविंद दास आदि साहित्यकारों ने प्रयास किया, लेकिन संभव नहीं हो पाया।
डा विनोद मिश्र ने कहा कि हिंदी साहित्य आम बोल चाल की भाषा में बहुत ही सरल शब्दों में अपनी बात कह सकते हैं। भारत ही नहीं पुरे विश्व में 156 देशों में हिन्दी बोली, पढी, लिखी जाती हैं। हम हिंदी वासी होकर भी हिन्दी बोलने मे शर्म करते हैं, लेकिन बाहर विदेशी लोगों ने अपनाया है और गौरव से सीखते हैं। बहुत बडे देशों मे भी हिंदी भाषा सीखने, पढने, लिखने की कक्षाओं का भी आयोजन करते हैं। कार्यक्रम में हिन्दी साहित्य विषय पर हिंदी की अनिवार्यता पर अपने विचार पीयूष कुमार दिवेदी, ‘‘हिन्दी साहित्य प्रांजल भाषा‘‘ डा शशिकांत त्रिपाठी ने विचार रखा। कार्यक्रम में का सफल संचालन डा किरण त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डा शान्त चतुर्वेदी, षिक्षक, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। इस आशय की जानकारी एस पी मिश्र पीआरओ ने दी।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
“जनपद* चित्रकूट
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