*मानसिक रोगियों से करना चाहिए सहानुभूतिपूर्ण बर्ताव – विदुषी*

चित्रकूट ब्यूरो: उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में सोमवार को जिला मुख्यालय में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जिसमें प्राधिकरण की पूर्ण कालिक सचिव विदुषी मेहा ने कहा कि मानसिक रूप से ग्रसित व्यक्ति को देखभाल व उपचार दोनों की आवश्यकता होती है, स्वास्थ्य विभाग का दायित्व है कि वह प्रत्येक गांव जाकर मानसिक रूप से पीडित लोगों को चिन्हित करें और उनको उपचार दे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विभाग के साथ-साथ शिक्षा विभाग में भी अध्यापकों द्वारा बच्चों को, जो मानसिक रूप से गृसित है, उन्हें चिन्हित कर उपचार दिलाएं। कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि बाल विकास विभाग व स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान चलाकर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दिलाया जा रहा है। कहा कि कुपोषण से भी बच्चे मानसिक रूप से ग्रसित हो जाते हैं। सभी संबंधित विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए मानसिक रूप से ग्रसित व्यक्तियों की देखभाल तथा उपचार कराएं।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा विषय है, जो हमारे जीवन में बेहद अहमियत रखता है। फिर भी अधिकांश लोग इसको अनदेखा करते हैं। मानसिक तनाव, डिप्रेशन, डिमेशिया फोबिया जैसी कई मानसिक बीमारियां हैं, जो पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही हैं। सोशल डिस्टेंसिंग आईसोलेशन से यह समस्या और भी बढ़ गई है। लागों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने नालसा द्वारा मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के संबंध में संचालित योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। इस शिविर में उन्होंने मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों के अधिकारों उपचार, चयन का अधिकार, स्वास्थ्य देखभाल का अधिकार, गरिमा से जीने का अधिकार, स्वास्थ्य से संबंधित सूचना प्राप्त करने का अधिकार, गोपनीयता व एकांतता का अधिकार, निःशुल्क विधिक सेवा प्राप्त करने का अधिकार आदि पर भी चर्चा की।

 

*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

*जनपद* चित्रकूट