उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) चित्रकूट: जिला मुख्यालय की गांधीगंज निवासी दीक्षा ने बताया कि बच्चों के पोषणको बेहतर करने के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताकी सलाह को अमल किया। इससे उनकी तीन साल की पुत्री रिद्धी स्वस्थ स्पर्धा में प्रथम आई। दीक्षा के मुताबिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने छह माह तक बच्चे को केवल स्तनपान और छः माह के बाद मां के दूध के साथ अर्ध ठोस आहार देने की सलाह दी थी। बताया कि केला को दूध के साथ मसलकर, दाल को इसके पानी में मसलकर और दलिया को मसलकर दूध के साथ और रोटी को अच्छी तरह मसलकर दूध के साथ देना है। एक साल के बाद स्तनपान के साथ साथ दाल, रोटी, सब्जी, चावल, दलिया, दूध, अंडा जितना बच्चे मांगे उन्हें दे सकते हैं। दीक्षा ने बताया कि उसने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के सुझावों को अमल किया और बच्ची के छह माह पूरे होने के बाद पोहा पकाकर उसमें हल्का सा नमक डालकर खिलाती थी। दूध में केला मसलकर बनाना शेक देती थी। शाम के वक्त सूजी की खीर खिलाती थी। एक साल के बाद दाल, रोटी, सब्जी, चावल, दलिया, दूध सब देने लगी। दूध की अतिरिक्त मांग पर गाय का दूध भी देती थी। उन्होंने दो साल तक अपनी बच्ची को स्तनपान करायाद्य एक साल के बाद से हीअब तक घर में मौजूद खाद्य पदार्थों को ही देती हूँ। वर्तमान में बच्ची का वजन 10 किलोग्राम से अधिक है। वहीं कर्वी ब्लाक के बगैहा गाँव घुरेटनपुर निवासी सुकेता ने बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने छह माह तक केवल स्तनपान के साथ छः माह के बाद अर्ध ठोस आहार सहित बच्चे के खानपान के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी, उनके सुझाओं को अमल किया, उनकी तीन साल की पुत्री सोनम को हरी पत्तेदार सब्जियां, दलिया की खिचडी, दूध, अंडा और केला खिलाती थी। सुकेता ने बताया कि बच्ची का वजन 10 किलोग्राम से ऊपर है। सोनम ने भी स्वस्थ स्पर्था में जगह बनाई है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बच्चे के जन्म से लेकर पांच साल तक सही देखभाल व पोषण से उनके शरीर और मस्तिष्क का सही विकास होता है। यदि शुरुआत से पालन पोषण में लापरवाही हुई तो वह धीरे धीरे कुपोषण की श्रेणी में आ जाते हैं, और जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। इस वर्ष जनपद में हुयी स्वस्थ बालक बालिका प्रतिष्पर्धा में निर्धारित 50 मानकों के आधार पर कुल 2730 बच्चों को क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पर पुरस्कृत किया गया।
बच्चों के लिए संतुलित आहार उसकी उम्र के आधार पर निर्धारित होता है। जीरो से छः माह तक केवल स्तनपान कराना है। यहाँ तक कि अलग से पानी भी नहीं देना है। मां के दूध से ही बच्चे को पानी की आवश्यकता पूरी हो जाती है। छः माह के ऊपर घर का बना हुआ अर्ध ठोस आहार थोड़ी थोड़ी मात्रा में मां के दूध के साथ देना चाहिए। जैसे जैसे बच्चा बढ़ता जाए ऊपरी आहार की मात्रा व बारंबारता बढ़ाई जाए। बच्चे को अंडा, हरी पत्तेदार सब्जियां और फल भी दे सकते हैं। बच्चे की लम्बाई, ऊंचाई, वजन मानकों के आधार पर है तो अभिभावक के लिए अच्छा है, यदि अनुपात सही नही है तो उसके लिए प्रयास करना चाहिए, किसी भी विपरीत स्थिति में चिकित्सक से परामर्श जरुर लेना चाहिए।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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