राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) चित्रकूट: नर्स को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मी को दोष सिद्ध होने पर न्यायालय ने पांच वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से भी दण्डित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गोपाल दास ने बताया कि हमीरपुर जिले की रहने वाली एक महिला ने बीती 29 अप्रैल 2018 को कर्वी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला के अनुसार उनकी पुत्री एक स्वास्थ्य केन्द्र में नर्स के पद पर कार्यरत थी। जिसे कर्वी के उतारखाना निवासी जुनैद उर्फ काकू पुत्र अख्तर ने किराए का मकान दिलाया था। स्वास्थ्य विभाग में संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत जुनैद विवाहित होने के बाद भी उसकी पुत्री से बताया था कि उसकी शादी नहीं हुई है। प्रेम जाल में फंसाकर जुनैद ने उसका शारीरिक शोषण किया और विवाह की बात होने पर जुनैद और उसके परिवार वालों ने बाद में खुलाशा किया की जुनैद शादीशुदा है। साथ ही उसकी पुत्री पर शारीरिक शोषण की बात को किसी से न कहने का दबाव बनाने लगे। जिसके बाद पुत्री ने खुद की जान को खतरा भी बताया था। 27 अप्रैल 2018 को जुनैद द्वारा उन्हें बेटी की मृत्यु की सूचना मिली। मृतका की मां के अनुसार जुनैद से प्रताड़ित होकर ही उनकी बेटी ने आत्महत्या की थी।
पुलिस ने इस मामले में धारा 306 भा.द.सं. के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद बुधवार को त्वरित न्यायालय के अपर सत्र न्यायाधीश विनीत नारायण पाण्डेय ने निर्णय सुनाया। जिसमें धारा 306 के तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपी जुनैद को पांच वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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