उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर।मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति तिथि पर नहीं, बल्कि सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ प्रारंभ होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष संक्रांति का पुण्यकाल दिन में पड़ रहा है, इसलिए स्नान,दान और धार्मिक कर्म दिन में करना विशेष फलदायी रहेगा।उन्होंने बताया कि संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति लग्न से लेकर सूर्यास्त तक माना गया है,जबकि मध्याह्न काल (दोपहर) को महापुण्य काल कहा गया है। इस समय किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना प्राप्त होता है।पंडित गौरव शास्त्री के अनुसार शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि संक्रांति का पुण्य उदय-व्यापिनी तिथि के आधार पर नहीं, बल्कि सूर्य के राशि परिवर्तन से निर्धारित होता है। इसी कारण 15 जनवरी को दिन में स्नान-दान करना सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
संक्रांति पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान
उन्होंने बताया कि इस दिन सूर्यदेव के कारक तत्वों जैसे पिता,गुरु,शासन,धर्म और आत्मसम्मान का अपमान नहीं करना चाहिए। क्रोध, अहंकार और कटु वाणी से बचना आवश्यक है। तामसिक आचरण, मांस-मदिरा व नशे का सेवन वर्जित माना गया है। साथ ही अशुद्ध वस्त्र एवं काले रंग के प्रयोग से भी परहेज करना चाहिए।
सूर्य कृपा के लिए करें ये शुभ कार्य
मकर संक्रांति के दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में तिल मिश्रित जल या गंगाजल से स्नान करना उत्तम है। इसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल पुष्प और गुड़ डालकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।उन्होंने बताया कि “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जप अत्यंत लाभकारी होता है।दान में तिल, गुड़, खिचड़ी, अन्न, वस्त्र, कंबल और तांबे का विशेष महत्व है। गौसेवा, अन्नदान और बुजुर्गों व ब्राह्मणों का सम्मान करने से सूर्यदेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
मिलेगा विशेष ज्योतिषीय लाभ
पंडित गौरव शास्त्री ने बताया कि शास्त्रोक्त विधि से मकर संक्रांति पर किए गए कर्मों से सूर्य दोष और पितृ दोष का शमन, मान-सम्मान व आत्मबल में वृद्धि, रोजगार और व्यवसाय में उन्नति तथा आरोग्य व दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।उन्होंने कहा कि उत्तरायण के इस पावन पर्व पर लिया गया संकल्प दीर्घकाल तक सिद्ध होता है।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर
You must be logged in to post a comment.