तालाब की जमीन पर कब्जा, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) चित्रकूट, ब्यूरो। एक ओर योगी आदित्यनाथ प्रदेश भर में तालाबों और सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के सख्त निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चित्रकूट जनपद की कर्वी तहसील के ग्राम अकबरपुर (ब) में राजस्व विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। यहां तालाब के भीटे की बेशकीमती सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कराए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं।

– मंदिर रोड स्थित सरकारी भूमि पर निर्माण का आरोप

मामला कर्वी तहसील क्षेत्र के ग्राम अकबरपुर (ब) का है। ग्रामीणों के अनुसार मंदिर रोड स्थित मेन रोड से लगी तालाब की सरकारी जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि भू-माफिया रात के अंधेरे में निर्माण कार्य को अंजाम दे रहे हैं, ताकि प्रशासन की नजर से बचा जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र के लेखपाल की मिलीभगत से यह कब्जा संभव हो पाया है। जब उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को तालाब पर हो रहे अवैध निर्माण की जानकारी दी गई तो उन्होंने बताया कि मामला संज्ञान में है और कानूनगो व लेखपाल को पैमाइश कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। एसडीएम का कहना है कि उन्होंने पहले भी निर्माण कार्य रुकवाया था और पुनः लेखपाल को निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि प्रशासनिक आदेशों का पालन आखिर क्यों नहीं हो पा रहा है।

– “ऊपर तक सेटिंग” की चर्चा, अधिकारियों का नहीं भय

सूत्रों के अनुसार संबंधित लेखपाल की “ऊपर तक सेटिंग” होने की चर्चा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी अवैध कब्जे की शिकायत की जाती है तो लेखपाल यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि “एसडीएम को अवगत करा दिया गया है।”
करीब एक माह पूर्व ग्राम अकबरपुर के प्रधान पति के नेतृत्व में 100 से 150 ग्रामीणों ने तहसील परिसर में लेखपाल के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

– सुविधा शुल्क लेकर खुली छूट देने के आरोप

ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ राजस्व कर्मियों द्वारा सुविधा शुल्क लेकर अवैध निर्माण को खुली छूट दी जाती है। आरोप यह भी है कि निर्माण पूर्ण होने के बाद औपचारिकता के तौर पर धारा 67 की कार्रवाई का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया जाता है।
यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न है, बल्कि शासन की मंशा को भी प्रभावित करता है।

– “सैया भये कोतवाल…” जैसी स्थिति

ग्रामवासियों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई की जाए तो कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन पर कब्जा करने का साहस नहीं करेगा। उनका आरोप है कि कुछ कर्मचारी उच्चाधिकारियों को गुमराह कर मामले में लीपापोती कर देते हैं। ऐसे में कहावत चरितार्थ होती दिख रही है—“सैया भये कोतवाल तो डर काहे का।”

– अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

जनपद के जागरूक नागरिकों की निगाहें अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि तालाब की सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन कब तक ठोस कदम उठाता है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला शासन की मंशा और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

 

रिपोर्टर पंकज सिंह राणा चित्रकूट