उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। रंगों और उल्लास का प्रतीक होली का त्योहार नजदीक आते ही शहर का माहौल पूरी तरह होली मय होने लगा है। बाजारों में रंग-गुलाल, पिचकारियों और मिठाइयों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है। वहीं कई मोहल्लों और कॉलोनियों में होलिका दहन की तैयारियां भी तेज हो गई हैं। इस बार वर्ष 2026 में होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। कहीं 2 मार्च तो कहीं 3 मार्च को होलिका दहन होने की चर्चा चल रही थी। ऐसे में शहरवासियों के मन में सही तिथि को लेकर उत्सुकता बनी हुई थी। इसी बीच ज्योतिषाचार्य पंडित गौरव शास्त्री ने पंचांग के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर लोगों की उलझन दूर कर दी है।
पूर्णिमा तिथि का महत्व
पंडित गौरव शास्त्री के अनुसार इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से हो रही है, जबकि इसका समापन 3 मार्च की सुबह 5:07 बजे होगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है। इसलिए तिथि का सही समय जानना आवश्यक माना जाता है। कई बार भद्रा काल और पंचांग के समय के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है।
भद्रा काल बना कारण
उन्होंने बताया कि 2 मार्च की शाम से भद्रा का प्रभाव शुरू होकर 3 मार्च की सुबह 4:56 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में किसी भी प्रकार का शुभ या मांगलिक कार्य करना उचित नहीं माना जाता। यही वजह है कि इस बार होलिका दहन की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस बना रहा।
रात में शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन का शुभ समय रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के बीच रहेगा। यह समय भद्रा पुच्छ काल माना जाता है, जिसमें होलिका दहन करना शास्त्रों के अनुसार मान्य होता है। पंडित गौरव शास्त्री ने बताया कि इस मुहूर्त में दहन करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
चार मार्च को खेली जाएगी होली
इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ने के कारण रंगों की होली की तारीख भी चर्चा में रही। पंचांग के अनुसार 2 मार्च की रात होलिका दहन होगा, 3 मार्च को ग्रहण रहेगा और 4 मार्च को रंगों की होली पूरे उत्साह के साथ मनाई जाएगी।
ऐसे होती है पूजा
परंपरा के अनुसार होलिका दहन से पहले विधि-विधान से पूजा की जाती है। होलिका की परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत, गेहूं की बालियां, नारियल और जल अर्पित किया जाता है। इसके साथ “ॐ होलिकायै नमः” मंत्र का जाप कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। अगले दिन कई स्थानों पर लोग होलिका की राख को तिलक के रूप में लगाते हैं, जिसे शुभ माना जाता है।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर
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