उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,14 फरवरी 2021 बांग्ला समाज के पारंपरिक पौष-फागुन मेला का धूमधाम से आयेजन हुआ। मेला बांग्ला भ्राषा शिक्षा एवं संस्कृति प्रसार समिति ने रविवार को बाल संग्रहालय चारबाग के मैदान में किया। कला संस्कृति से सजे मेला में बंग समाज देर रात तक उमंग उत्साह में डूबा रहा। पारंपरिक लोक कलाकारों ने बाउलष् वादन कर आनंदित किया। मनोरंजन से भरी प्रतियोगिताओं में लोगों ने उत्साह दिखा, तो बांग्ला समाज के पारंपरिक व्यंजनों की सोंधी खुशबू छायी रही। मुख्य अतिथि यूपी मानवाधिकार आयोग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डॉ. देव कुमार डे थे। रामकृष्ण मठ के स्वामी मुक्तिनाथानंद, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ शुभाशीष मुंशी, सचिव केके घोष, कोषाध्यक्ष सोनाली राय, कमल जी, टी.टी. सुनीलजी सहित कई कला-संगीत प्रेमीयों के साथ हजारों बंग परिवार मेले में मौजूद थे। मेला के प्रमुख व्यवस्थापक व संस्था के महामंत्री दादा के.के.घोसाल ने बताया कि मेले की शुरुआत बांग्ला समाज के लोगों ने लखनऊ में, शांति निकेतन (कोल्कता) में रविन्द्र नाथ टैगोर जी के पौष मेला के एक सौ वर्ष पूर्ण होने पर 1994 में वरिष्ठ पत्रकार दादा पी.के. रॉय (अध्यक्ष) के विशेष मार्गदर्शन में शुरु की, जो आज भी अनवरत सारे लखनऊ वासी बंग समाज के संग, उमंग से प्रति वर्ष जनवरी के दूसरे रविवार को प्रातः10 रात्रि 10तक संचालित है, कोल्कता शांति निकेतन के पौष मेला के बाद ये सम्पूर्ण भारत में अपने प्रकार का इकलौता आयोजन है। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज समिति कोषाध्यक्ष सोनाली राय ने प्रार्थना से की। उन्होंने सुमधुर वंदना ‘सौका तोरे आई कांदी हे साकुले३‘ गाकर की। इसके बाद वेस्ट बंगाल से आये बाउल गायकों ने पारंपरिक लोक संगीत के सुर सजाये। वरिष्ठ बाउल गायक षष्टीदास ने अपने दल के कलाकारों के साथ प्रस्तुति दी। जिसमें दोतारा व गायन में प्रापो विश्वास, बाउल पर भारती सरकार, खमक पर बापुन, एकतारा पर निखिल विश्वास ने बंगाल के लोक संगीत से रूबरू कराया। कलाकारों ने कान्ना हासिर दोल दोलानो पोष फागुन मेला, सौका तोरे आई कांदी हे साकुले, अमी एक दिन न देखिलम तारे, भवे मानुष गुरु निष्ठा जात सर्व साधन सिद्धि हाउतार जैसे लोकगीत सुनाये। बांग्ला समाज के पारंपरिक व्यंजन व मिठाइयों का लोगों ने खूब जायका लिया। मेले में खजूर गुड़, मिठाई पाटीसाप्टा, कुलीपीठा, रसगुल्ला, संदेश जैसे व्यंजनों की खुशबू घुली रही। मेले में रंगोली, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता, बांग्ला लेखन व कवितापाठ, म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिताओं में लोगों ने खूब उत्साह दिखाया।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
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