उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय(दैनिक कर्मभूमि)चित्रकूट।नदी सफाई के नामपर सिंचाई विभाग सरकारी धन का बंदरबांट कर रहा है। हर साल सफाई के लिए आधा दर्जन से ज्यादा नावें कर्वी से रामघाट तक लगाई जाती हैं। रोज की सफाई के नामपर 10 से 15 हजार खर्च हो रहे हैं और सफाई उसके मुकाबले नगण्य है।
बुन्देली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार फिर सिंचाई विभाग ने रामघाट से लेकर कर्वी मंदाकिनी नदी की सफाई शुरू कराई है। सफाई के लिए नावें लगाई गई हैं, नाव का किराया और प्रत्येक नाव में दो लोग सफाई के लिए लगाए गए हैं। नाव में बैठकर सफाई टीम केवल ऊपरी कचरा और आंशिक चोई घास निकाल रहे हैं। रामघाट में तो केवल ऊपरी कचरा निकालकर नदी को स्वच्छ किया जा सकता है, लेकिन नयागांव रपटा से बूड़े हनुमान मंदिर तक और कर्वी के घाटों के आसपास गंदगी का अंबार है। यहां चोई घास का कब्जा है। सफाई के नामपर धन का बंदरबांट किया जा रहा है, 10-15 हजार सफाई में रोज खर्च हो रहे हैं और उसके मुकाबले सफाई एकदम नगण्य है। इसके अलावा सफाई के दौरान सिंचाई विभाग का कोई कर्मचारी मौके पर नहीं रहता। सफाई के लिए नाव लगा दी और बस काम समाप्त। सफाई कराने वाले ठेकेदार बिल बाउचर दे देंगे और मिलकर धन का बंदरबांट कर लेते है। बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि नदी सफाई प्रकरण की जांच कराई जाए। सरकारी धन का दुरुपयोग न हो और सफाई के नामपर लूट न हो।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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