योगी सरकार की चुप्पी का आखिर क्या है राज , आठ हजार शिक्षामित्रों की मौत का जिम्मेदार कौन

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय(दैनिक कर्मभूमि)चित्रकूट ब्यूरो। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने कैबिनेट में अनुदेशको और रसोइयों के मानदेय में बढोत्तरी का ऐलान कर दिया है, लेकिन दो दशक पूर्व से बेसिक शिक्षा विभाग में बेहतर सेवा दे रहे शिक्षा मित्रों के सवाल पर सरकार चुप है।

कई चुनावो में मुद्दा बन चुका शिक्षा मित्रों का सवाल सरकार के लिए अहम क्यों नही है? ऐसा कौन सा रहस्य है, जिस पर से पर्दा उठना बाँकी है। चित्रकूट के वरिष्ठ शिक्षा मित्र नेता सर्वेश यादव का कहना है कि गत पांच सालों में सरकार के ऐसे कोई भी नेता, मंत्री, विधायक, सांसद नही बचे, जिनको शिक्षा मित्र प्रतिनिधियों ने अपनी वेदना न बताई हो, किन्तु समस्या का समाधान का कोरा आश्वासन ही मिला। यहाँ तक कि समायोजन रद्द होने के बाद 2017 में विशाल जनसमूह बनारस की रैली में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि शिक्षा मित्र आत्महत्या न करें, शिक्षा मित्रों की जिम्मेदारी मेरी। इस जिम्मेदारी के बाद से अब तक 8,000 शिक्षा मित्र काल के गाल में समा गए, किन्तु किसी ने भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुये इनके घावों पर मरहम लगाने का काम नही किया। कहा कि महंगाई और अपमान के बोझ तले दबा ये तबका आज भी अच्छे दिनों की आस में टक टकी लगाये है। एक शिक्षा मित्र बी.एल.ओ जनगणना, बालगणना, जैसे राष्ट्रीय जिम्मेदारी पूर्ण कार्य के अलावा नामांकन, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण, मध्यान्ह भोजन संचालन जैसे कार्यो का निर्वहन करने के लिए योग्य है, किन्तु जायज उचित पारिश्रिमिक की मांग करने पर अयोग्य कहकर हंसी का पात्र बना दिया जाता है। जबकी इसी कार्य के लिए एक सरकारी शिक्षक को 70-80 हजार और एक शिक्षा मित्र को मात्र दस हजार वो भी सिर्फ ग्यारह माह का, शिक्षा मित्रों को इसका उत्तर चाहिए। उन्होंने सरकार से यक्ष प्रश्न करते हुये कहा कि जब तीन तलाक, जलीकट्टू, एससी/एसटी पर सरकार अध्यादेश ला सकती है, तो 8000 शिक्षा मित्रों की असमय मौतों पर क्यों नहीं लाती, जबकी शिक्षा मित्र पद का जन्म ही भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हुआ। स्थाई समाधान का वादा भी सरकार के संकल्प पत्र में था, फिर अध्यादेश क्यों नही जारी करते।

उन्होंने उत्तर प्रदेश के यशश्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कुछ इस तरह निवेदन किया- डूब रही कश्ती हमारी संभालेगा अब कौन, सालों से लगी उम्मीद जिनसे वही खड़े हैं मौन। मान गया सम्मान गया गई न मन की आस, भीगे नैना राह निहारत, दुःख दूर करो अब नाथ।।

 

*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

*जनपद* चित्रकूट