*निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले का सुधर जाता है जीवन – अमित कृष्ण शास्त्री*

उत्तर प्रदेश(दैनिक कर्मभूमि) चित्रकूट: मुख्यालय के गल्ला मंडी प्रांगण में श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वितीय दिवस भागवताचार्य अमित कृष्ण शास्त्री महाराज ने सैकड़ों श्रोताओं को कथा सुनाते हुए कहा कि कलियुग में जीवन सुधारने का सर्वोत्तम माध्यम भागवत है।

कथा व्यास ने कहा कि निष्काम भाव से प्रभु का स्मरण करने वाले लोग अपना जन्म और मरण दोनों सुधार लेते हैं। प्रभु जब अवतार लेते हैं तो माया के साथ आते हैं। साधारण मनुष्य माया को शाश्वत मान लेता है और अपने शरीर को प्रधान मान लेता है जबकि शरीर नश्वर है। उन्होंने कहा कि श्री मद्भागवत की सीख है कि कर्म ऐसा करो जो निष्काम हो, वही सच्ची भक्ति है। संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चैरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न-भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्मो द्वारा इस बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है। तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार और दुर्जनों का संहार किया करते हैं। जीव को इस बात का आनंद मनाना चाहिए की भगवत कृपा से हमारे पास रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था हो गई है। उन्होंने भागवत के चार अक्षरों का अर्थ समझाया, भ से भक्ति, ग से ग्यान, व से वैराग्य और त से त्याग। उन्होंने आस्थावानों को श्रोता और वक्ता की महिमा भी बताई। कथा व्यास ने श्रोताओं को विस्तार से परीक्षित जन्म की कथा सुनाई। इस मौके पर यजमान दुर्गा प्रसाद, रामा देवी केषरवानी, श्याम मुनि तिवारी, राकेश केषरवानी, रवि, अमित केषरवानी, मनोरमा, उमा, रीता, रामलाल, प्यारेलाल, हीरालाल केषरवानी, सोम केषरवानी, अंशु, कार्तिक, अनिरुद्ध आदि सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

 

 

*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

*जनपद* चित्रकूट