ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा है गुरु का मिलना : प्रशांत सिंह

उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर। सनातन धर्म के प्रति आस्था रखने वाले प्रशांत सिंह ने गुरु महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी गुरुओं के चरणों में उनका नमन है,लेकिन जैसे प्रत्येक व्यक्ति के लिए उसके माता-पिता और गुरु सर्वोपरि होते हैं, उसी प्रकार उनके लिए गुरुदेव आचार्य श्री श्रीकांत जी महाराज ही सर्वश्रेष्ठ और सर्वोपरि हैं।प्रशांत सिंह ने कहा कि सच्ची भक्ति और निष्ठा उसी गुरु में होती है, जो शिष्य को सन्मार्ग दिखाता है और जीवन के मूल्यों,मर्यादाओं व रहस्यों से परिचित कराता है। गुरु ही अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं।उन्होंने गुरु महिमा का उल्लेख करते हुए कहा “न गुरुरधिकं तत्त्वं न गुरुरधिकं तपः। तत्त्वज्ञानात् परं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः।”यह श्लोक गुरु के महत्व को स्पष्ट करता है।

प्रशांत सिंह ने कहा कि जीवन में गुरु का मिलना ईश्वर की सबसे बड़ी कृपा है,क्योंकि गुरु ही हमें भगवान के पथ पर अग्रसर करते हैं। मनुष्य स्वयं इतना समर्थ नहीं होता कि श्रेष्ठ गुरु की खोज कर सके, लेकिन जब भाव निर्मल हों,भक्ति सच्ची हो और पात्रता पूर्ण हो, तब ब्रह्मांड में सर्वव्यापी श्रेष्ठ गुरु स्वयं शिष्य को चुन लेते हैं।उन्होंने कहा कि गुरु की शरण में प्राप्त होने वाला अलौकिक ज्ञान संसार की किसी अन्य जगह से प्राप्त नहीं हो सकता। गुरु कृपा से ही जीवन का कल्याण और आत्मिक उन्नति संभव है।

संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर