उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) कानपुर।भक्ति, श्रद्धा और आत्मिक शांति से सराबोर वातावरण में आचार्य श्री श्रीकांत महाराज ने अपने प्रवचन से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जब तक सच्चा और सिद्ध गुरु नहीं मिलता, तब तक व्यक्ति ईश्वर की सही पहचान नहीं कर पाता। गुरु ही वह दीपक है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर साधक को सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ाता है।
महाराज ने कहा कि सिद्ध गुरु अपने शिष्यों के बुरे कर्मों, गलत विचारों और नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त कर उन्हें संयम, सेवा और साधना के मार्ग पर चलना सिखाते हैं। गुरु की कृपा से ही साधक का जीवन सफल और सार्थक बनता है।
तंत्र को लेकर फैली भ्रांतियों पर किया प्रहार
आचार्य श्रीकांत महाराज ने तंत्र को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आजकल तंत्र के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि वास्तविक तंत्र डराने वाला नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित बनाने वाला माध्यम है। तंत्र का ज्ञान सबसे पहले भगवान शिव ने माता पार्वती को दिया था, जो आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हम भोजन करते हैं ताकि शरीर को ऊर्जा मिले और हमारा पाचन तंत्र उसे शक्ति में बदल देता है, वैसे ही आध्यात्मिक तंत्र मन और आत्मा को मजबूत बनाता है। इससे डरने या दूर भागने की जरूरत नहीं है।
श्रद्धा और निष्ठा से ही मिलती है ईश्वर की अनुभूति
आचार्य श्री श्रीकांत महाराज ने कहा कि ईश्वर की प्राप्ति किसी दिखावे, आडंबर या चमत्कार से नहीं होती। इसके लिए सच्चा मन, अटूट श्रद्धा और गुरु द्वारा बताए गए मार्ग पर पूरी निष्ठा से चलना जरूरी है। जब मनुष्य अपने विचार, वाणी और कर्म को शुद्ध कर लेता है, तभी उसे परमात्मा की अनुभूति होती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अंधविश्वास, डर और भ्रम से दूर रहकर सत्गुरु की शरण में जाएं और अपने जीवन को धर्म, सेवा और सद्भाव से सजाएं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने प्रवचन से प्रेरित होकर आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया।
संवाददाता आकाश चौधरी कानपुर
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