उत्तरप्रदेश (दैनिक कर्मभूमि)
*क्रासर*
(ज्ञानपुर कोतवाली क्षेत्र के वेदपुर गांव निवासी संत पिता की पिटाई से दुखी होकर भाग निकले थे मुम्बई)
ज्ञानपुर,भदोही। समूचे देश में लॉक डाउन के दौरान 16 अप्रैल की रात पालघर कांड के शिकार दो साधुओं में एक 70 वर्षीय साधु कल्पवृक्ष गिरी उर्फ किशन तिवारी उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद के कोतवाली क्षेत्र ज्ञानपुर स्थित वेदपुर गांव के निवासी रहे । उनके पिता का नाम चिंतामणि व माता का नाम राजकुमारी था। माता राजकुमारी का बीते 22 अप्रैल 2020 को मौत हो चुकी है। पिता पहले ही स्वर्गवासी हो चुके हैं ।
बताया जाता है कि वह पांच भाइयों में चौथे नंबर पर थे । उनका लगाव व आस्था बचपन से ही साधु संत संग रही। जिसके चलते पढ़ाई में कमजोर रहे। उनकी शिक्षा क्षेत्र के भुसौला नामक गांव स्थित प्राइमरी पाठशाला में चल रही थी पढ़ाई में कमजोर होने के चलते उनके पिता ने 10 वर्ष की उम्र में अचानक उनकी पिटाई कर एक कमरे में बंद कर दिया था । मौका पाकर अचानक वह खिड़की के रास्ते भाग निकले और सीधे मुंबई पहुंच गए । जहां जोगेश्वरी नामक स्थान में एक मंदिर पर पुजारी का कार्य करने लगे इस बीच साधु संतों के संपर्क में रहते हुए पंच दशनाम जूना अखाड़ा 13 मई में शामिल हो गए ।
यहां यह भी बताते चलें कि जब देश दुनिया भर के प्रताड़ित साधु – संत महाराष्ट्र के उन गौरवशाली योद्धाओं से सुरक्षा पाते थे, जिनकी भुजाओं और तलवारों मैं के दम पर अब तक हिंदू संस्कृत अपने मूल रूप में बची हुई थी यह बताया जाता है की महाराष्ट्र के पालघर स्थित तलाशरी गांव में अहमदाबाद नेशनल हाईवे की तरफ वे मुंबई से अपने गुरु भाई संत रामगिरी महाराज जिनका सूरत में निधन हो गया था, उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने बाबा किशन तिवारी अपने एक अन्य साधु व निजी ड्राइवर के साथ नेशनल हाईवे से गुजर रहे थे, कि आगे तलाशरी गांव के पास अचानक गाड़ी रुकवा कर कुछ लोग चोर चोर चिल्लाते हुए धारदार हथियार व लाठी-डंडों से पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई ।घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर जा पहुंची। जहां पुलिस ने उन्हें कुछ देर तक पुलिस चौकी में बैठा रखा। थोड़ी देर बाद उन्हें अपनी जीप में बिठाया ।इसके बाद जैसे ही लेकर बाहर निकले उन पुलिसकर्मियों के सामने ही लोगों द्वारा पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई । पोस्टमार्टम के दो दिन बाद इनका शव त्रवकेश्वर अखाड़ा को पुलिस द्वारा सौंप दिया गया और उन्हें अखाड़े द्वारा ही समाधि दे दी गई ्।पुलिस ने इसके आगे अन्य कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया है । वही उनके भाइयों मेंबड़े भाई क्रमश: लालचन्द,कपूरचंद (एक अन्य मृतक) तथा राकेशचन्द तिविरी बताया कि यह कृत्य एक जघन्य अपराध है महाराष्ट्र पुलिस को चाहिए कि ऐसे लोगों को अविलंब फांसी की सजा दे देनी चाहिए।
रिपोर्ट – कृष्ण कुमार उपाध्याय भदोही
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