उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) रायबरेली जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव व मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक गोयल ने निर्देश दिये है कि जनपद में ग्लैंडर्स/फार्सी घेड़ो, गधों व खच्चरों में पायी जाने वाली संक्रामक बीमारी के नियंत्रण हेतु पशु चिकित्साधिकारी पूरी तरह से जागरूक रहकर इस बीमारी को न फैले इस पर विशेष ध्यान देते हुए कोविड-19 संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए नियमानुसार प्रभावी कार्यवाही की जाए। यह बीमारी लाइलाज होती है, यह बीमारी मनुष्यों में भी हो सकती है इस बीमारी से मृत्यु सुनिश्चित है। इसके लक्षण, कारण व बचाव आमजनमानस को भी बताया जाए। इस बीमारी को कोई टीका व इलाज नही है। यह बीमारी पशु से मनुष्यों में भी फैलती है। संदेह होने पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी/उप पशु चिकित्साधिकारी व नजदीकी सरकारी पशु चिकित्साधिकारियों से सम्पर्क करें। गलैण्डर्स रोग भारत सरकार द्वारा नोटिफाईएबल जुनोटिक रोग की श्रेणी में आता है तथा बर्खोलडेरिया मलाई बैक्टीरिया द्वारा फैलता है।
घोड़े गधे खच्चर जो अश्व प्रजाति में आते है को रोगमुक्त रखने हेतु जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के निर्देशानुसार सीरो सर्विलेंस योजनान्तर्गत ग्लैन्डर्स/फार्सी रोग से बचाव के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन विकास भवन के गांधी सभागार में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा0 गजेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि घोड़ो की प्रजाति में होने वाली ग्लैन्डर्स/फार्सी बीमारियों के होने वाले प्राथमिक लक्षण के सम्बन्ध में बताया कि मुख्यता त्वचा में फोड़े व घुमडिया, नाक के अन्दर फटे हुए छाले दिखना, तेज बुखार, नाक से स्राव, खांसी आना आदि प्रमुख लक्षण होते है। इस बीमारी का कोई टीका या इलाज नहीं है। यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में फैलती है यह बीमारी लाइलाज और घातक है। इस बीमारी से ग्रस्त पशु इलाज के बाद सामान्य दिखते हुए भी बीमारी अन्य स्वस्थ पशुओं में रहता है। अतः इस बीमारी का संदेह होने पर नजदीकी सरकारी पशुचिकित्सक से सम्पर्क करें व पशु चिकित्सकों को समय-समय पर पशुओं का रक्त नमूना परीक्षण हेतु नमूना लेने में सहयोग करें। इस बिमारी के प्राथमिक उपचार न होने पर पशुओ सहित मनुष्यों में भी फैल सकती है।
अनेक पशु चिकित्साधिकारियों/विषय विशेषज्ञों द्वारा इस बिमारी का इतिहास संक्रमण बचाव के साथ-साथ घोड़ो के स्वास्थ्य के विषय में पूर्ण जानकारी दी। सीरो सर्विलेंस योजनान्तर्गत सीरम, नमूना जांच इस बीमारी के होने पर घोड़े, खचरो, टट्टुओ का डिस्पोजल नमूना लेते समय पशु चिकित्सक विशेष सावधानी अपनाए पशु रोग ग्रसित होने पर रोग के आम आदमी में भी फैलने की प्रबल सम्भावना उत्पन्न होती है।
डा0 वी0के0 पाण्डेय, डा0 रामशब्द एवं बू्रक्स इण्डिया के डा0 दिनेश मौर्या आदि पशु चिकित्सकों ने बहुत ही तकनीकी जानकारी प्रोजेक्टर के माध्यम से दी। प्रशिक्षण में नोडल पशु चिकित्साधिकारी डा0 नितेन्द्र सिंह ने भी अपने सम्बोधन में उन्होंने इस बिमारी के सम्बन्ध में आये हुए पशु चिकित्सकों, पशुधन प्रसार अधिकारी तथा क्षेत्रीय घोड़े पालने वाले को भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम इस बिमारी के लक्षण दिखने पर सम्बन्धित पशु चिकित्साधिकारियों को अवगत कराते हुए जिलाधिकारी को भी अवगत कराये। जिससे इस रोग के बचाव के लिए टीम का गठन करके तत्काल इस रोग को फैलने से बचाव व घोड़े को भी बचाया जा सके। प्रशिक्षण में उपनिदेशक सूचना द्वारा प्रदेश सरकार की उपलब्धियांे वाली सबका-साथ सबका-विकास और सबका-विश्वास सुशासन की पुस्तिका भी दी गई और कहा कि चिकित्सक सरकार की योजनाओं को जाने डा0 के0पी0 सिंह, डा0 एस0के0 कनौजिया, डा0 कर्णवीर सिंह, डा0 यशपाल सिंह, डा0 जावेद आलम, डा0 अर्चना, डा0 एच0एन0 मिश्रा, आलोक पाण्डेय, प्रेम शंकर पाण्डेय आदि समस्त उप मुख्य चिकित्साधिकारी, पशु चिकित्साधिकारी, पशु धन अधिकारी तथा क्षेत्रीय घोड़े पालने वाले लोग भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
संवाददाता- श्रवण कुमार रायबरेली
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