उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) लखनऊ,12 मार्च 2021 एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने विधान सभा सचिवालय के बर्खास्त अनुसेवक प्रेमचंद पाल द्वारा अक्टूबर 2019 में आत्महत्या किये जाने के मामले की जाँच की मांग की है। पुलिस कमिश्नर लखनऊ, डीजीपी तथा अन्य अधिकारीयों को भेजी अपनी शिकायत में नूतन ने कहा है कि उन्हें प्रेमचंद पाल के 14 अक्टूबर 2019 के दो सुसाइड नोट मिले हैं. इनमे हस्तलिखित सुसाइड नोट में कहा गया है कि उनकी मौत के जिम्मेदार प्रमुख सचिव विधान सभा तथा रेखा दीक्षित हैं, दोनों लोगों ने उनकी जिन्दगी बर्बाद कर दी. टाइप्ड सुसाइड नोट के अनुसार श्री पाल का कार्य संतोषप्रद होने के बाद भी उन्हें षडयंत्र के तहत बर्खास्त कर दिया गया, जिसके कारण उनका परिवार भुखमरी पर पहुँच गया था. नोट के अनुसार उनकी बर्खास्तगी में प्रमुख भूमिका प्रदीप कुमार दुबे, प्रमुख सचिव, विधान सभा, सीपी तिवारी समीक्षा अधिकारी, सुरेश द्विवेदी, ज्ञानदत्त दीक्षित, दीपक कुमार मिश्रा आदि की थी, जिन्होंने झूठा आरोप लगा कर उन्हें बर्खास्त कर दिया. नोट के अनुसार फर्जी तरीके से उनके नाम पर विधान सभा की सोसाइटी से रु० 22,24,023 का लोन ले लिया गया, जबकि उस लोन में प्रेमचंद पाल को मात्र रु० 3,50,000 ही मिला, बाकि पैसा ज्ञानदत्त दीक्षित, अनुभाग अधिकारी द्वारा ले लिया गया। नूतन के अनुसार ये दोनों सुसाइड नोट मिलने के बाद भी इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गयी, न तो कोई एफआईआर दर्ज हुआ और न कोई जाँच की गयी. उन्होंने कहा कि संभवतः ये सुसाइड नोट भी गायब कर दिए गए हैं। अतः उन्होंने इन आरोपों को सत्यापित कर इनके सम्बन्ध में जाँच करवाने तथा जाँच के आधार पर आवश्यक विधिक कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया है।
रिपोर्टर सिद्धार्थ त्रिवेदी रायबरेली
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