खराब ओर आलसी जीवन शैली मधुमय रोग को देती है आमंत्रण,मधुमेह रोग से बचना है तो आलस त्यागों,योग करो और रहो हमेशा निरोग ,,,,,,एस.एल.धाकड़

राजस्थान राष्ट्रीय (दैनिक कर्मभूमि) छीपाबड़ौद छबड़ा विधानसभा क्षेत्र के श्री हनुमान सिद्ध साधना आश्रम,भुवाखेड़ी स्थित अलख निरंजन ज्योति ध्यान योग केंद्र,अमीरपुर खेड़ी पर महन्त सेवानन्द पुरी महाराज की ऑनलाइन अध्यक्षता में विश्व मधुमेह दिवस पर जनजागृति हेतु वार्ता का आयोजन किया गया।योग संग़ठन मंत्री परमानन्द शर्मा के अनुसार मधुमेह रोग की वार्ता के लिए वार्ताकार शंकर लाल नागर को ऑनलाइन ज़ूम एप लिंक भेज वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया।नागर ने सम्बोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार समूची दुनियां की लगभग छह प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है।अब भारत को विश्व मधुमेह की राजधानी कहा जाय तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। भारत में लगभग आज पांच करोड़ से भी अधिक मधुमेह रोगी हो सकते हैं आपके घर कोई आये और वो बोले कि कम शक्कर वाली चाय लाना तो समझो शुगर का व्यापारी नही है।एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 के अंत तक यह बीमारी भारत के लोगों में बढ़कर 10 करोड़ के आसपास हो जाने की आशंका है अर्थात तब हर दसवां मधुमेह रोगी भारतीय होगा।यह मधुमेह वृध्दि की दर चिंताजनक है विश्व भर में इस रोग के निवारण में प्रति वर्ष लगभग 300 से 600 मिलियन डॉलर खर्च हो जाता है। इस बीमारी से हर साल लगभग 50 लाख लोग नेत्रों की ज्योति खो देते हैं और दस लाख लोग चोट लगने का घाव नही भरने से अपने पैर गंवा बैठते है।मधुमेह के कारण प्रति मिनट छह मौते होती हैं।यदि कोई व्यक्ति इस बीमारी से बीमार होने पर अन्य रोग से भी ग्रस्त है ओर उसे मधुमेह भी है तो इलाज के दौरान मधुमेह से शरीर में स्थित गुर्दे नाकाम होने का यह एक प्रमुख कारण मधुमेह भी बन जाता है। आज विश्व के लगभग 95 प्रतिशत रोगी टाईप 2 मधुमेह से पीड़ित है।मधुमेह के आंकड़े चौंकाने वाले हैं और हमें सोचना होगा कि ऐसा क्यों हो रहा है वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि भारत में आनुवांशिक तौर पर मधुमेह की आशंका बलवती है,इसका संबंध किसी विशेष आयु,वर्ग या लिंग से नहीं है बल्कि आधुनिक जीवन शैली ने ही युवाओं और छोटे बच्चों तक को इस रोग से पीड़ित कर दिया है।आजकल होटलों और फास्ट फूड़ सेंटर्स में जाने का चलन बढ़ा है। लोग आवश्यकता से अधिक कैलोरी का भोजन करके मोटापे का शिकार हो रहे हैं जबकि उनकी दिनचर्या में व्यायाम और शारीरिक श्रम का अभाव होता जा रहा है देर रात तक जागना ओर सुबह देरी से उठना मधुमेह रोगों को आमंत्रण दे सकता है।आधुनिक जीवन शैली योग को छोड़ भोग की ओर उन्मुख है आज मांस और शराब की पेंशन सभी जाति,वर्गों में आम होती जा रही है।आलसी जीवन शैली युवाओं और बच्चों में यह प्रवृत्ति आम होती जा रही है। आहार-विहार,आचार-विचार बदलने के कारण कम उम्र के मधुमेह रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।साधारण भाषा में इसे शुगर या शक्कर की बीमारी भी कहते हैं जो कभी अमीरों के घर होती थी परन्तु आज गरीब कोई नही रहा तो यह बीमारी 10 मेसे 1 घर में मेहमान बन जा पहुंची है।यहां शक्कर से आशय हमारे शरीर में व्याप्त ग्लूकोज से है रक्त ग्लूकोज शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और कार्बोहाइड्रेट आंतों में पहुंचकर ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है फिर अवशोषित होकर रक्त में पहुंचता है। रक्त से कोशिकाओं के भीतर उसका प्रवेश होता है और इसके लिए हमारे शरीर को इंसुलिन की आवश्यकता होती है।इंसुलिन एक हार्मोन है जो शरीर के पेंक्रियाज (अग्नाशय)नामक ग्रंथि से निकलता है। इंसुलिन की कमी से रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है जोकि मूत्र के साथ बाहर निकलता है और मधुमेह रोग का सूचक माना जाता है। मतलब यह है कि मधुमेह इंसुलिन की कमी से होता है न कि किसी अन्य कारण से मधुमेह की चिकित्सा का उद्देश्य है रक्त में शुगर की मात्रा को सामान्य रखना अन्यथा शरीर के अन्य अंगों जैसे नाक, कान,गला,आंख,दांत और पैरों को मधुमेह से क्षति पहुंचती है। ध्यान रहे कि मधुमेह किसी भी उम्र में हो सकता है और इसके दो प्रकार हैं।टाइप वन मधुमेह,पहले प्रकार का मधुमेह है प्राय: बचपन या युवावस्था में यह रोग होता है जिसे टाइप वन मधुमेह कहते हैं। इसमें अग्नाशय ग्रंथि से बहुत कम मात्रा में इंसुलिन उत्पन्न होती है या बिल्कुल उत्पन्न नहीं होती इसके रोगी को नियमित रूप से रक्त ग्लूकोज़ के नियंत्रण के अलावा जीवित रहने के लिए अन्य माध्यमों से इंसुलिन लेनी पड़ती है।दूसरा टाइप-2 मधुमेह है।टाइप-2 मधुमेह ही अधिक आयु के लोगों में होता है,यह बीमारी तब होती है जब शरीर के ऊतक इंसुलिन की सामान्य या अधिक मात्रा के लिए बहुत संवेदनशील या प्रतिरोधक होते हैं इस स्थिति में अग्नाशय से कम इंसुलिन उत्पन्न होती है इस मधुमेह के कुछ रोगियों के लिए भी इंसुलिन लेना आवश्यक होता है।मधुमेह के पीड़ितों में लगभग 90 प्रतिशत टाइप 2 मधुमेह के ही रोगी होते हैं।इन रोगियों में रक्त ग्लूकोज अनियंत्रित होने पर शरीर में पानी की अधिकता और नमक की कमी हो जाती है अन्य जटिलताओं में आंखों की रोशनी जाना,मूत्राशय और गुदे का संक्रमण तथा इसमें खराबी आ जाती है,धमनियों में चर्बी के जमाव के कारण चोटों से संक्रमण तथा हाथ-पैरों में गैंग्रीन और हृदय रोग होने का ख़तरा बना रहता है। अत: ऐसे रोगियों का सिर्फ़ मधुमेह का उपचार नहीं होता बल्कि डॉक्टर्स को उनके तमाम अंगों की कार्यप्रणाली भी नियंत्रित करनी पड़ती है।नागर ने कहा कि इस रोग से बचना है तो लोगों को

खान-पान व स्वस्थ जीवन शेली अपनाना ही होगा और प्राचीन भारत की वैदिक संस्कृति अपनानी होगी,चूंकि मधुमेह अब भारत में आम बीमारी का रूप ले चुका हैं,ठीक से जांच की जाय तो हर घर में इसका एक न एक मरीज अवश्य है इस रोग को ठीक नहीं किया जा सकता पर दवाओं, व्यायाम और सही खान पान से नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है। एक समय था जब अधेड़ा वस्था में ही किसी को मधुमेह होता था पर अब यह बीमारी भी बदलती जीवन चर्या और जागरूकता के अभाव वश ‘युवा’हो गई है यानी आज बच्चे और युवा वर्ग इससे अधिकाधिक पीड़ित हो रहे हैं अतः हमे बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए उन्हें खेल-कूद एवं शारीरिक श्रम वाली गतिविधियों के लिए उन्हें प्रेरित करना नितांत आवश्यक होगा आज हम कोविड जैसे वाइरस से भी जूझ रहे है और लम्बे समय से घर मे है जिससे मोटापा बढ़ रहा है और ऊर्जा व्यय नही होने से मधुमेह के रोगियों की हार्ट अटैक से मृत्यु होने की संभवना बढ़ रही है। मोटापे से बचने हेतु घर मे ही 2 से 3 किलोमीटर पैदल चले ओर योग और प्राणायाम जरूर करें।युवा ख़ास तौर पर सावधान रहें जिनके माता-पिता मधुमेह से ग्रस्त हैं उन्हें मोटापे से बचना चाहिए और गरिष्ठ एवं अधिक वसायुक्त भोजन,चिप्स,पिज्जा, बर्गर,नूडल्स आदि से परहेज करना चाहिए,युवाओं को भी इस रोग से बचने के लिए स्वस्थ ओर योग की जीवन-शैली अपनानी चाहिए और स्वास्थ्यवर्ध्दक पोषक तत्वों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।आहार में वसायुक्त पदार्थों और शक्कर की मात्रा कम लेनी चाहिए इसके अलावा प्रति वर्ष एक बार रक्त परीक्षण एवं अन्य जांच भी करवानी चाहिए।
स्मरण रहे कि मधुमेह जड़ से खत्म होने वाला रोग नहीं है,इसे व्यायाम,संतुलित आहार व प्राकृतिक उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है,चूंकि यह आनुवंशिकी के साथ-साथ गलत जीवनचर्या से उपजने वाली बीमारी हैं अत: इसकी चिकित्सा में व्यायाम एवं प्राकृतिक उपायों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। सच तो यह है कि संतुलित आहार विहार और स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर जीवन पर्यंत निरोग रहा जा सकता हैअत:बाल्यावस्था से ही इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए।रोगग्रस्त होने के बाद रोगमुक्ति हेतु प्रयास करने से कहीं बेहतर है कि निरोगी काया के लिए स्वाभाविक रूप से सदैव सजग रहा जाये।अनुवांशिक कारणों के आलावा अनियमित जीवन शैली,तनाव, शारीरिक व्यायाम का ना होना इस बीमारी का मुख्य कारण है। इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में चेतना जागृत करने के लिए प्रत्येक वर्ष 27 जून को विश्व मधुमेह जागृति दिवस मनाया जाता है अतः इस बीमारी से बचने के लिए आवश्यक है कि हम सब स्वस्थ जीवन-शैली अपनाएं,स्वास्थ्यवर्ध्दक पोषक आहार लें एवं आहार में वसायुक्त पदार्थों और शक्कर की मात्रा कम लेने का प्रयास करें इसके अलावा प्रति वर्ष एक बार रक्त परीक्षण एवं अन्य जांच भी करवानी चाहिए और जो मधुमेह से पीड़ित हैं वो व्यायाम,संतुलित आहार व प्राकृतिक उपचार से ही इस बीमारी पर नियंत्रण पा सकते हैं।समापन पर महन्त सेवानन्द पुरी ने कहा कि रामायण के सभी पात्रों से हमें सीखना है यह पात्र हमें तप,सेवा,सुमरण ओर समर्पण का संदेश देते है हम भी इन पात्रों जैसा सादा जीवन बिताएंगे ओर उच्च विचार रखेगें तो कभी बीमार नही होंगे।ज़ूम एप वार्ता में सतीश शर्मा,युवराज मीणा,राजकुमार मीणा,बाबू लाल सुमन,रामप्रसाद,शिवचरण आदि ने भाग लिया।मधुमेह रोग जागृति दिवस वार्ता में भाग लेने पर योग संगठन मंत्री शर्मा ने आभार जताया और आमजन से कोविड-19 गाइड लाइन की पालना करनी का अनुरोध किया गया।

संवाददाता कुलदीप सिंह सिरोहीया बारां छीपाबड़ौद