उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय(दैनिक कर्मभूमि)चित्रकूट। महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.भरत मिश्रा के मार्गदर्शन में मंगलवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन किया गया। वर्चुअल संगोष्ठी में वक्ताओं ने पर्यावरण से जुडे़ अपने विचार रखे।
मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के प्रो दीपक व्यास कहा कि यदि प्रकृति के साहचर्य का बहुत अच्छा उदाहरण देखना हो तो भगवान शंकर के परिवार को हम देख सकते हैं। भगवान शंकर के परिवार में भगवान गणेश का वाहन चूहा है, भगवान शंकर के गले में सांप है और भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है। कहने का मतलब यह कि उनके तीनों वाहन एक-दूसरे के विरोधी हैं, तब भी तीनों एक जगह उपस्थित हैं तथा उनके बीच कोई विरोध नहीं है। आशय यह कि प्रकृति में सामंजस्य बनाकर कार्य करने से हमारी उन्नति होगी। विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता पो. आई.पी. त्रिपाठी ने कहा कि हमारे पूर्वज पहले से ही प्रकृति की पूजा करते रहें है। अगर कोई भी शुभ काम शुरू होता था तो मिट्टी, जल आदि की पूजा की जाती थी। जैसे वैवाहिक कार्यक्रम सबसे पहले मिट्टी पूजा से ही शुरू होता था। हिन्दी विभाग की डाॅ कुसुम सिंह ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन की सहचरी है। अतः पर्यावरण व प्रकृति का संरक्षण और सम्वर्द्धन करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है ताकि आने वाली पीढियों को हम स्वस्थ जीवन व परिवेश दे सकें। वेब संगोष्ठी में डॉ. संतोष आरसिया, डॉ. आर. सी. त्रिपाठी, डॉ. साधना, डॉ. एस. एस. गौतम, डॉ. राजेश शुक्ला, डॉ. लक्ष्मी नारायण गुप्ता आदि शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन प्रो. घनश्याम गुप्ता ने किया।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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