उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय(दैनिक कर्मभूमि)मानिकपुर, चित्रकूट: तहसील क्षेत्र के रैपुरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास अशोक ओझा ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है।
कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कथा व्यास ने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया। इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है, वह हर किसी में बसता है। श्रीमद्भागवत कथा सुनकर श्रोता मन मुग्ध रह गए। कथा के मुख्य यजमान शिवशंकर द्विवेदी और उमा देवी है। इस मौके पर केशव द्विवेद, प्रेमशंकर द्विवेदी, अनिल द्विवेदी, संतोष, अजय, धनंजय आदि मौजूद रहे।
*ब्यूरो रिपोर्ट* अश्विनी कुमार श्रीवास्तव
*जनपद* चित्रकूट
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