दलित–ओबीसी प्रतिनिधित्व के साथ विद्यासागर सोनकर को राज्यसभा का अवसर

उत्तर प्रदेश (राष्ट्रीय दैनिक कर्मभूमि)जौनपुर

भाजपा का सामाजिक संतुलन और जौनपुर की नई राजनीतिक आवाज

जौनपुर।भाजपा ने सपा के पीडीए का किया काउंटर राज्यसभा की सूची से उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची को सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक संतुलन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूची में दलित, ओबीसी और सवर्ण समाज के प्रतिनिधियों को स्थान देकर भाजपा ने सामाजिक भागीदारी का व्यापक संदेश दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी ने इस चयन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया है। यह खासतौर से समाजवादी पार्टी के पीडीए का जवाब है कि भाजपा कहने नहीं करने में विश्वास करती है। भाजपा ने दिखा दिया की वह सर्वसमाज की भावना को ध्यान में रखकर काम करती है।
इस सूची में जौनपुर के वरिष्ठ नेता विद्यासागर सोनकर का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सीमा द्विवेदी के बाद जौनपुर को राज्यसभा में लगातार दूसरी बार प्रतिनिधित्व मिलने जा रहा है। यह केवल जौनपुर के लिए राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि पूर्वांचल के उन कार्यकर्ताओं और नागरिकों के लिए भी सम्मान का विषय है, जिन्होंने लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेतृत्व को महत्व दिया है।
विद्यासागर सोनकर का राजनीतिक सफर बूथ स्तर के संगठनात्मक कार्य से शुरू होकर संसद के उच्च सदन तक पहुंचा है। विद्यार्थी जीवन में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और संगठनात्मक संस्कारों के साथ सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़े। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए अनुसूचित जाति मोर्चा, युवा संगठन, क्षेत्रीय संगठन और प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे पूर्व सांसद, विधान परिषद सदस्य और भाजपा के प्रदेश महामंत्री के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
उनकी पहचान केवल पदों के कारण नहीं है। जौनपुर की राजनीति में विद्यासागर सोनकर को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिनकी स्मरणशक्ति और जनसंपर्क क्षमता असाधारण है। कई वर्ष पहले मिले व्यक्ति को भी वे नाम लेकर संबोधित कर लेते हैं। यह गुण सामान्य राजनीतिक औपचारिकता से आगे बढ़कर आत्मीय संबंध का रूप ले लेता है। उनके समर्थक मानते हैं कि वे लोगों को केवल मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि अपने सामाजिक और पारिवारिक संबंधों का हिस्सा मानते हैं।
उनकी सहजता और सरल व्यवहार ने उन्हें व्यापक स्वीकार्यता दी है। वे छोटे कार्यकर्ता से लेकर वरिष्ठ पदाधिकारी तक, सभी से समान आत्मीयता से मिलते हैं। सार्वजनिक जीवन में जहां पद और प्रोटोकॉल अक्सर दूरी पैदा कर देते हैं, वहीं विद्यासागर सोनकर का स्वभाव लोगों को अपने निकट खींचता है। उनका व्यक्तित्व संगठनात्मक अनुशासन और मानवीय संवेदना का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से उनके लंबे जुड़ाव ने उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को गहराई दी है। संघ के कार्यकर्ताओं और विचार परिवार से जुड़े लोगों के बीच उनकी स्वीकार्यता का एक कारण यह भी है कि उन्होंने संगठन को केवल चुनावी मंच नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और राष्ट्रसेवा का माध्यम माना। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और कठिन परिस्थितियों में सक्रियता ने उन्हें पार्टी के भरोसेमंद नेताओं में स्थान दिलाया। यही कारण है कि समय-समय पर प्रदेश के शीर्ष राजनीतिक दायित्वों और यहां तक कि उपमुख्यमंत्री पद के लिए भी उनके नाम की चर्चा होती रही है। हालांकि ऐसी चर्चाएं राजनीतिक स्तर पर रही हैं और उन्हें आधिकारिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राज्यसभा के लिए उनका नामांकन खटीक समाज के लिए भी गौरव का अवसर है। खटीक समाज ने सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनी पहचान बनाई है। विद्यासागर सोनकर का उच्च सदन तक पहुंचना इस समाज के युवाओं में नई उम्मीद और आत्मविश्वास पैदा कर सकता है। यह संदेश भी जाता है कि संगठन, परिश्रम और सार्वजनिक जीवन के प्रति प्रतिबद्धता के बल पर समाज के सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला कार्यकर्ता राष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका बना सकता है।
भाजपा के लिए यह चयन राजनीतिक प्रतिनिधित्व से अधिक व्यापक सामाजिक संवाद का अवसर है। दलित और ओबीसी समाज को नेतृत्व में स्थान देना तभी सार्थक होगा, जब उनके वास्तविक मुद्दे—शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सम्मान, उद्यमिता और राजनीतिक भागीदारी—नीतिगत विमर्श का हिस्सा बनें। विद्यासागर सोनकर जैसे अनुभवी नेता इस संवाद को संसद में प्रभावी रूप से आगे बढ़ा सकते हैं।
जौनपुर को एक बार फिर उच्च सदन में आवाज मिलने जा रही है। यह जिले के लिए गर्व का विषय है कि यहां की जनता और संगठन से निकला एक सरल, सहज और जनप्रिय नेता राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण मंच पर अपनी भूमिका निभाने जा रहा है। विद्यासागर सोनकर का राज्यसभा तक पहुंचना उनके व्यक्तिगत राजनीतिक सफर की उपलब्धि तो है ही, साथ ही जौनपुर, पूर्वांचल और खटीक समाज के लिए भी सम्मान और संभावनाओं का नया अध्याय है।
डॉ. सुनील कुमार असिस्टेंट प्रोफेसर जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर

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